World War Bomb : झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत पानीपाड़ा गांव के पास स्वर्णरेखा नदी में मिले दो विश्व युद्धकालीन अमेरिकी बमों को भारतीय सेना की विशेष टीम ने बुधवार को सफलतापूर्वक डिफ्यूज कर दिया। यह ऑपरेशन बेहद संवेदनशील और जोखिम भरा था, लेकिन सेना की सूझबूझ और तकनीकी दक्षता से एक बड़ा हादसा टल गया। पहला बम करीब 10 दिन पहले और दूसरा दो दिन पहले बरामद हुआ था, जिसके बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया था।
तीन दिन तक चला हाई अलर्ट ऑपरेशन
दोनों बमों को निष्क्रिय करने के लिए भारतीय सेना की विशेष टीम पिछले तीन दिनों से बहरागोड़ा में कैंप कर रही थी। ऑपरेशन को पूरी गोपनीयता और सुरक्षा के साथ अंजाम दिया गया। बम डिफ्यूज से पहले सेना ने ड्रोन के जरिए एक किलोमीटर के दायरे में सर्वे किया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी व्यक्ति खतरे के क्षेत्र में मौजूद न हो।
खाली कराया गया इलाका
इस अभियान में झारखंड पुलिस और पश्चिम बंगाल पुलिस ने भी अहम भूमिका निभाई। सुरक्षा के मद्देनजर डेढ़ किलोमीटर क्षेत्र को ‘नो मेंशन जोन’ घोषित कर दिया गया और एक किलोमीटर के दायरे में रहने वाले सभी लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया। खेतों में काम कर रहे मजदूरों से लेकर स्थानीय ग्रामीणों तक, सभी को हटाने में प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
15 फीट गड्ढे में रखकर किया गया ब्लास्ट
सेना की टीम ने बमों को जमीन में करीब 15 फीट गहरे गड्ढे में रखकर बालू की बोरियों से ढक दिया। इसके बाद एक किलोमीटर दूर से तार के जरिए रिमोट कंट्रोल से बमों को डिफ्यूज किया गया। पहले बम को निष्क्रिय करने के 30 मिनट बाद दूसरे बम को डिफ्यूज किया गया। इस दौरान जोरदार धमाका हुआ, जिससे आसमान में काला और सफेद धुआं फैल गया और जमीन पर गहरी खाई बन गई।
मौके पर मौजूद रहा प्रशासन, मेडिकल और फायर टीम
ऑपरेशन के दौरान बहरागोड़ा के प्रशासनिक अधिकारी, घाटशिला एसडीपीओ अजीत कुमार कुजूर और मुसाबनी डीएसपी संदीप भगत मौके पर डटे रहे। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मेडिकल टीम और दमकल विभाग को भी अलर्ट पर रखा गया था। अधिकारियों ने सुनिश्चित किया कि पूरे अभियान के दौरान किसी प्रकार की अफवाह या भय का माहौल न बने।
हजारों ग्रामीण पहुंचे देखने
बम डिफ्यूज की खबर फैलते ही आसपास के गांवों से हजारों की संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। हालांकि पुलिस ने कड़ी मशक्कत कर भीड़ को सुरक्षित दूरी पर रोके रखा। अभियान की सफलता के बाद प्रशासन और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है, क्योंकि समय रहते इस खतरे को टाल दिया गया।


