Jharkhand News: झारखंड भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की रांची इकाई ने बुढ़मू अंचल कार्यालय में जमीन के दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के नाम पर रिश्वत लेने के मामले का खुलासा करते हुए अंचल अधिकारी (सीओ), भू-राजस्व कर्मचारी और एक अन्य आरोपित को गिरफ्तार किया है। एसीबी ने कार्रवाई के दौरान 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए एक आरोपित को रंगेहाथ पकड़ा, जिसके बाद जांच के आधार पर दो अन्य अधिकारियों को भी गिरफ्तार किया गया।
एसीबी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, मांडर थाना क्षेत्र के ब्रांबे गांव निवासी सुबोध कुमार ने शिकायत दर्ज कराई थी कि बुढ़मू प्रखंड के मौजा सासम स्थित 3 एकड़ 20 डिसमिल भूमि की रजिस्ट्री उनकी पत्नी पिंकी देवी, साली जया कुमारी और संगीता गुप्ता के नाम होने के बावजूद म्यूटेशन नहीं किया जा रहा था। सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बाद भी आवेदन लंबित रखा गया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब उन्होंने अंचल कार्यालय में म्यूटेशन की स्थिति की जानकारी ली तो अंचल अधिकारी सच्चिदानंद कुमार वर्मा ने उन्हें भू-राजस्व कर्मचारी राजेश किशोर रवि से मिलने को कहा। आरोप है कि राजेश किशोर रवि ने दाखिल-खारिज करने के एवज में 80 से 90 हजार रुपये रिश्वत की मांग की। बाद में बातचीत के दौरान कम राशि लेकर काम कराने की बात तय हुई।
इसके बाद राजेश किशोर रवि ने अपने भाई गौतम कुमार से शिकायतकर्ता की बातचीत कराई। गौतम कुमार ने पहली किस्त के रूप में 10 हजार रुपये देने और शेष राशि बाद में देने पर म्यूटेशन कराने का आश्वासन दिया। रिश्वत देने के बजाय शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की जानकारी एसीबी को दी।
शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने गोपनीय सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत मांगने के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। इसके बाद विशेष ट्रैप टीम गठित कर योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई की गई। तय योजना के अनुसार शिकायतकर्ता ने गौतम कुमार को 10 हजार रुपये दिए। जैसे ही उसने रिश्वत की रकम स्वीकार की, पहले से मौजूद एसीबी टीम ने उसे रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया।
ट्रैप के दौरान मिले साक्ष्यों और सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर एसीबी ने बुढ़मू के अंचल अधिकारी सच्चिदानंद कुमार वर्मा और भू-राजस्व कर्मचारी राजेश किशोर रवि को भी गिरफ्तार कर लिया। तीनों आरोपितों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।
एसीबी अधिकारियों ने बताया कि जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि म्यूटेशन के नाम पर रिश्वत वसूली का यह मामला किसी संगठित नेटवर्क का हिस्सा तो नहीं था। यदि जांच के दौरान अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


