New Delhi:- अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से लौटे ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की और अपने स्पेस मिशन के अनुभव साझा किए। इस मुलाकात में प्रधानमंत्री ने उनसे कई दिलचस्प सवाल पूछे। प्रधानमंत्री मोदी ने मजाकिया अंदाज में सबसे पहले पूछा— “होमवर्क पूरा हुआ?” इस पर शुभांशु शुक्ला ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि मिशन सफल रहा है लेकिन यह अंत नहीं बल्कि शुरुआत है। उन्होंने कहा कि मिशन का उद्देश्य यही था कि हम सीखें और आगे बढ़ें।
बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने जानना चाहा कि कैप्सूल में 23-24 घंटे की यात्रा के दौरान सीटिंग अरेंजमेंट कैसा रहता है। इस पर शुक्ला ने बताया कि शुरुआत में स्पेसक्राफ्ट में बैठे रहना पड़ता है, लेकिन अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद सीमित स्पेस में मूवमेंट संभव हो जाता है। हालांकि, पृथ्वी पर लौटने पर शरीर को दोबारा सामान्य स्थिति में आने में समय लगता है, क्योंकि दिमाग को नए वातावरण को समझने के लिए ‘री-वायरिंग’ करनी पड़ती है।
प्रधानमंत्री ने उनसे पूछा कि स्पेस स्टेशन पर कितना समय तक रहा जा सकता है। शुक्ला ने बताया कि अब तक का सबसे लंबा समय 8 महीने है और इस मिशन से ही इसकी शुरुआत हुई है। उन्होंने बताया कि मूंग और मेथी उगाने का प्रयोग बेहद सफल रहा, क्योंकि ये पौधे माइक्रो-ग्रेविटी में भी आसानी से अंकुरित हो जाते हैं और भविष्य की अंतरिक्ष यात्राओं में पौष्टिक भोजन का एक बड़ा साधन बन सकते हैं।
शुक्ला ने यह भी साझा किया कि जब वे आईएसएस पहुंचे तो सभी अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष यात्री भारत की प्रगति को लेकर बेहद उत्साहित थे और खासकर गगनयान मिशन के बारे में उनसे सवाल पूछते थे। उनके क्रू-मेट्स ने उनसे कहा कि जब भारत का गगनयान मिशन लॉन्च होगा तो वे उन्हें ज़रूर आमंत्रित करेंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि देश के पास अंतरिक्ष यात्रियों का एक बड़ा पूल तैयार हो। शुक्ला ने माना कि उनकी यात्रा के बाद भारत के बच्चों में एस्ट्रोनॉट बनने का सपना और मजबूत होगा।


