Ranchi News: झारखंड में जेपीएससी, जेएसएससी सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और धांधली के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्र-अभ्यर्थियों ने सरकार से अपनी मांगों पर लिखित जवाब देने की मांग की है। सरकार से वार्ता करने वाले प्रतिनिधिमंडल के सदस्य पीयूष कुमार ने शनिवार को कहा कि लगातार परीक्षाओं में सामने आ रही कथित गड़बड़ियों से गरीब और मेहनतकश विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है। अब इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में ‘हिन्दुस्थान समाचार’ से बातचीत में पीयूष कुमार ने कहा कि छात्र-अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर अनशन पर बैठे हैं। सरकार की ओर से अब तक लगातार आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन सिर्फ मौखिक आश्वासन से आंदोलन समाप्त नहीं होगा। सरकार को छात्रों की मांगों पर स्पष्ट और लिखित जवाब देना होगा।
उन्होंने कहा कि छात्रों की प्रमुख मांगों में संबंधित जेपीएससी परीक्षाओं को रद्द करना, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराना और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार करना शामिल है। पीयूष कुमार ने आरोप लगाया कि ब्लैकलिस्टेड एजेंसी टीडीपीएल के माध्यम से आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द किया जाना चाहिए। उन्होंने 14वीं, 13वीं और 11वीं जेपीएससी सीजीएल समेत संबंधित अन्य परीक्षाओं की भी जांच कराने की मांग की।
पीयूष ने कहा कि परीक्षा से जुड़े मामलों में जिन लोगों की संलिप्तता सामने आती है, उनकी उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उनका कहना है कि यदि जांच में प्रशासनिक अनियमितता सामने आती है तो मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराई जानी चाहिए। वहीं, वित्तीय अनियमितता मिलने पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच कराने की मांग की गई है।
छात्र प्रतिनिधि ने परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की भी मांग की। उन्होंने आयु सीमा में छूट देने, परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने तथा नियमित परीक्षा कैलेंडर जारी करने की मांग रखी। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की पूरी प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिससे विद्यार्थियों का भरोसा बना रहे और किसी भी स्तर पर अनियमितता की गुंजाइश न हो।
पीयूष कुमार ने कहा कि परीक्षा और भर्ती व्यवस्था में आवश्यक संस्थागत सुधार लागू किए जाने की जरूरत है। जब तक सरकार उनकी मांगों पर लिखित जवाब नहीं देती, तब तक अनशन और आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर अब केवल मौखिक आश्वासन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने छात्र-अभ्यर्थियों से 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि अधिक संख्या में छात्रों की भागीदारी से आंदोलन को मजबूती मिलेगी और सरकार पर उनकी मांगों पर ठोस निर्णय लेने का दबाव बढ़ेगा।


