Nawada News: नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में पटना हाईकोर्ट से दोषमुक्त हो चुके बिहार के पूर्व मंत्री राजबल्लभ प्रसाद यादव की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं। बिहार सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की है। सरकार ने अपनी याचिका में हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कई महत्वपूर्ण साक्ष्यों की अनदेखी किए जाने का दावा किया है।
इस मामले में निचली अदालत ने पूर्व मंत्री राजबल्लभ प्रसाद यादव को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। बाद में पटना हाईकोर्ट ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया था। अब बिहार सरकार ने हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने मामले में मौजूद कई ठोस प्रमाणों पर समुचित विचार नहीं किया। सरकार ने महिला चिकित्सक की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया है। याचिका के अनुसार, निचली अदालत के रिकॉर्ड में इस रिपोर्ट की चर्चा नहीं की गई थी और यह रिपोर्ट मुकदमे की संचिका का हिस्सा भी नहीं थी। सरकार का तर्क है कि इसके बावजूद रिपोर्ट को आधार बनाकर दोषमुक्त किया जाना न्यायसंगत नहीं है।
सरकार ने नाबालिग पीड़िता की उम्र से जुड़े प्रमाण और उसकी गवाही को भी महत्वपूर्ण बताया है। याचिका में कहा गया है कि उम्र प्रमाण पत्र तथा पीड़िता की गवाही को नजरअंदाज करना उचित नहीं था। सरकार की ओर से यह भी दलील दी गई है कि पीड़िता की गवाही को मामले में पर्याप्त महत्व दिया जाना चाहिए था।
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई हुई है और अगली सुनवाई की तारीख निर्धारित की गई है। बिहार सरकार की ओर से पूर्व मंत्री की रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने के बाद नवादा के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में भी इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
राजबल्लभ प्रसाद यादव की पत्नी विभा देवी भी इस मामले को लेकर राजनीतिक रूप से चर्चा में रही हैं। उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल से इस्तीफा देकर जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर नवादा से विधानसभा चुनाव जीता है। ऐसे में बिहार सरकार द्वारा उनके पति की रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर किए जाने को लेकर राजनीतिक हलकों में भी तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। सरकार की चुनौती के बाद अब हाईकोर्ट से मिली राहत बरकरार रहती है या मामले में आगे कोई नया मोड़ आता है, यह सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद स्पष्ट होगा।


