Jharkhand News: झारखंड के धनबाद से एक ऐसी मार्मिक कहानी सामने आई है, जो रिश्तों की जटिलता और मानवीय संवेदनाओं को गहराई से छू जाती है। करीब 20 साल पहले घर से लापता हुई एक महिला आज केरल के एक सरकारी आश्रय गृह में सुरक्षित मिली है। लेकिन इस कहानी में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अब जहां पति ने उसे अपनाने से इनकार कर दिया, वहीं बेटा मां को वापस लाने के लिए गुहार लगा रहा है।
मामला धनबाद जिले के पूर्वी टुंडी प्रखंड के चुरूरिया पंचायत स्थित कांशीटांड़ आदिवासी टोला की है। यहां की रहने वाली कबली देवी करीब दो दशक पहले अचानक लापता हो गई थीं। परिवार ने उन्हें ढूंढने की काफी कोशिश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। समय के साथ उम्मीदें भी खत्म होती चली गईं। अंततः उनके पति राजू मुर्मू उर्फ बुधु मुर्मू ने यह मान लिया कि अब वह जीवित नहीं हैं और उन्होंने दूसरी शादी कर अपनी नई जिंदगी शुरू कर दी।
कहानी में मोड़ तब आया जब करीब दो साल पहले सूचना मिली कि कबली देवी केरल के एक सरकारी आश्रय गृह ‘आशा भवन’ में रह रही हैं। बताया जाता है कि वह पिछले 10 वर्षों से वहां सुरक्षित हैं। इस संबंध में केरल के आईबी इंस्पेक्टर शिवन मुनातिल ने झारखंड पुलिस से संपर्क किया, जिसके बाद धीरे-धीरे पूरा मामला स्पष्ट हुआ। धनसार थाना के माध्यम से यह खबर गांव तक पहुंचाई गई।

जब यह सूचना पति तक पहुंची, तो उन्होंने कबली देवी को वापस लाने से साफ इनकार कर दिया। उनका कहना था कि अब उन्होंने अपनी नई जिंदगी बसा ली है। इस फैसले ने सभी को हैरान कर दिया। मामला जब अंचल अधिकारी सुरेश प्रसाद वर्णवाल के पास पहुंचा, तो उन्होंने संवेदनशीलता दिखाते हुए पहल की। स्थानीय मुखिया के साथ वे खुद राजू मुर्मू के घर पहुंचे और उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन पति का निर्णय नहीं बदला।
इस पूरी कहानी का सबसे भावुक पहलू तब सामने आया, जब कबली देवी का बेटा समर मुर्मू आगे आया। बचपन में मां से बिछड़ा समर अब जवान हो चुका है, लेकिन मां के लिए उसकी ममता आज भी उतनी ही गहरी है। उसने प्रशासन से अपील की है कि उसकी मां को वापस लाया जाए, ताकि वह उन्हें अपने साथ रख सके। अब सबकी नजरें प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या बेटे की इस भावुक पुकार पर कोई ठोस कदम उठाया जाएगा और क्या 20 साल बाद मां-बेटे का यह बिछड़ा रिश्ता फिर से जुड़ पाएगा।


