Gaya Ji: पितृपक्ष महासंगम के दौरान गया जी में देशभर से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है। अलग-अलग वेदियों पर पिंडदान और श्राद्ध कर्म कर लोग अपने पितरों की मोक्ष की कामना कर रहे हैं। इसी क्रम में पितृपक्ष के तीसरे दिन और गया श्राद्ध के दूसरे दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रेतशिला वेदी पहुंचे और अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान किया।
गया में स्थित प्रेतशिला को लेकर धार्मिक मान्यता है कि यहां विशेष रूप से उन मृतकों के लिए पिंडदान किया जाता है, जिनकी मृत्यु असामयिक या अप्राकृतिक परिस्थितियों में हुई हो। श्रद्धालुओं की मान्यता के अनुसार, अकाल मृत्यु होने पर आत्मा को प्रेत योनि से मुक्ति नहीं मिल पाती। ऐसे पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना के लिए प्रेतशिला पर पिंडदान किया जाता है।
प्रेतशिला पहाड़ के नीचे स्थित वेदी पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। पंडों के अनुसार, यहां आने वाले तीर्थयात्री अपनी परंपरा और संकल्प के अनुसार अलग-अलग अवधि का श्राद्ध कर्म करते हैं। कई श्रद्धालु 17 दिन का पिंडदान करते हैं, जबकि कुछ लोग पांच दिन, तीन दिन या एक दिन का गया श्राद्ध भी करते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रेतशिला पर पिंडदान करने से अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए पितरों को प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है। यहां विशेष धार्मिक विधि से पिंडदान के बाद सत्तू उड़ाने की परंपरा भी बताई जाती है। श्रद्धालु इसे अपने पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष से जोड़कर देखते हैं।
स्थानीय पंडों के अनुसार, प्रेतशिला पर्वत से जुड़ी धार्मिक परंपराओं में ब्रह्मा जी द्वारा अंकित तीन रेखाओं का भी उल्लेख मिलता है। इसी धार्मिक मान्यता के आधार पर श्रद्धालु यहां विधि-विधान से कर्मकांड पूरा करते हैं।
पितृपक्ष के दौरान प्रेतशिला में देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार भी बड़ी संख्या में तीर्थयात्री अपने पूर्वजों का श्राद्ध करने यहां पहुंचे हैं। कई परिवार कई पीढ़ियों के पूर्वजों के लिए एक साथ पिंडदान कर रहे हैं।
दिल्ली से आया एक परिवार भी 17 दिन के पिंडदान के लिए गया पहुंचा है। परिवार के सदस्यों ने बताया कि वे अपनी कई पीढ़ियों के पूर्वजों के लिए गया श्राद्ध कर रहे हैं। परिवार का मानना है कि गया जी में पिंडदान करने से पितरों को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
गया में पितृपक्ष के दौरान फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर सहित विभिन्न पिंडवेदी स्थलों पर श्रद्धालु कर्मकांड पूरा कर रहे हैं। प्रेतशिला भी गया श्राद्ध की प्रमुख वेदियों में शामिल है, जहां अकाल मृत्यु को प्राप्त पितरों के लिए विशेष रूप से पिंडदान किए जाने की धार्मिक परंपरा है।


