Bihar News: पटना: जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने संगठनात्मक स्तर पर अहम फैसला लेते हुए वरिष्ठ नेता श्रवण कुमार को विधानमंडल दल का नया नेता नियुक्त किया है। इस निर्णय पर अंतिम मुहर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लगाई। इसके साथ ही पार्टी के भीतर श्रवण कुमार की राजनीतिक पकड़ और प्रभाव को और मजबूती मिली है।
दरअसल, हाल ही में आयोजित जदयू विधायक दल की बैठक में सभी विधायकों ने सर्वसम्मति से नीतीश कुमार को नेता चुनने का अधिकार दिया था। इसके बाद उन्होंने विचार-विमर्श कर श्रवण कुमार के नाम को मंजूरी दी। पार्टी की ओर से उनका नाम विधानसभा सचिवालय को भेजा गया, जहां से आधिकारिक अधिसूचना जारी कर उनके चयन की पुष्टि कर दी गई।
राजनीतिक गलियारों में यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि हाल के दिनों में श्रवण कुमार की सुरक्षा बढ़ाकर वाई प्लस श्रेणी में कर दी गई थी। इसे उनकी बढ़ती राजनीतिक अहमियत का संकेत माना जा रहा है। वे लंबे समय से नीतीश कुमार के करीबी सहयोगी रहे हैं और नालंदा जिले से लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं।
69 वर्षीय श्रवण कुमार का राजनीतिक जीवन तीन दशक से अधिक का रहा है। उन्होंने 1995 में समता पार्टी के टिकट पर पहली बार नालंदा विधानसभा सीट से जीत हासिल की थी। उस चुनाव में समता पार्टी के केवल सात उम्मीदवार ही विजयी हुए थे, जिनमें वे भी शामिल थे। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार सात बार विधायक चुने गए।
छात्र जीवन में ही उन्होंने जेपी आंदोलन से प्रेरित होकर राजनीति में कदम रखा था। 1994 में जब नीतीश कुमार और जॉर्ज फर्नांडिस ने समता पार्टी का गठन किया, तभी से वे उनके साथ जुड़े रहे। बाद में समता पार्टी के जदयू में विलय के बाद भी उन्होंने पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखी।
श्रवण कुमार ने 1995 और 2000 में समता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीता, जबकि इसके बाद वे जदयू से लगातार जीत दर्ज करते रहे। वे बिहार विधानसभा में जदयू के मुख्य सचेतक भी रह चुके हैं। इसके अलावा, उन्होंने नीतीश कुमार और जीतन राम मांझी की सरकारों में मंत्री के रूप में भी कार्य किया है।
हालांकि, 2015 के विधानसभा चुनाव में उन्हें कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा था और वे महज करीब 3,000 वोटों के अंतर से जीत पाए थे। इसके बावजूद उन्होंने अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखी।
समाज सेवा से राजनीति में आए श्रवण कुमार इंटर तक शिक्षित हैं और जमीनी स्तर पर काम करने वाले नेता के रूप में उनकी पहचान रही है। उनकी नई जिम्मेदारी को उनके लंबे अनुभव, संगठन के प्रति समर्पण और नेतृत्व क्षमता का परिणाम माना जा रहा है।


