Bihar News: सीतामढ़ी के पवित्र सीता जन्मभूमि पुनौरा धाम में आयोजित श्री राम कथा के तीसरे दिन जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने भगवान श्रीराम और माता सीता के दिव्य स्वरूप तथा उनके सोलह गुणों का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। कथा का आयोजन सीता प्रेक्षागृह में किया गया, जहां सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से कथा का श्रवण किया।
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक रीति-रिवाजों के साथ गुरु पद पूजन से हुई, जिसे मुख्य यजमान जानकी नंदन पाण्डेय ने संपन्न किया। इसके बाद व्यास पीठ की पूजा और आरती के पश्चात कथा प्रारंभ हुई। अपने प्रवचन में गुरुदेव ने कहा कि श्रीराम और माता सीता में कोई भेद नहीं है, दोनों एक ही परम ब्रह्म के स्वरूप हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जो अयोध्या में राम हैं, वही मिथिला में सीता के रूप में विराजमान हैं।
रामभद्राचार्य जी ने बताया कि भगवान श्रीराम के सोलह विशेष गुण हैं, जो उन्हें पूर्ण और परम बनाते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीराम वही हैं जिनकी कृपा से मनुष्य के भीतर के काम, क्रोध, मद और अहंकार शांत हो जाते हैं। वे ही ब्रह्म हैं, जिनका वर्णन वेद और वेदांत में मिलता है, और जिनकी वंदना ब्रह्मा, विष्णु और महेश भी करते हैं। वे सर्वव्यापी, अंतर्यामी और समस्त जगत के ईश्वर हैं।
गुरुदेव ने यह भी बताया कि श्रीहनुमान जी ने भगवान राम की कृपा से सोलह महान कार्य संपन्न किए, जो उनकी भक्ति और समर्पण का प्रतीक हैं। इसी प्रकार माता सीता में भी सोलह श्रेष्ठ गुण विद्यमान हैं, जो उन्हें सर्वोच्च स्थान प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि सीता स्वयं परम ब्रह्म हैं और राम से अभिन्न हैं।
अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि “जहां राम हैं, वहां सीता अवश्य हैं,” और दोनों का स्मरण मात्र ही मनुष्य को भवसागर से पार करा सकता है। उन्होंने पुनौरा धाम को माता सीता की प्राकट्य भूमि बताते हुए कहा कि इसी स्थान से माता सीता का अवतरण हुआ था। गुरुदेव ने यह भी उल्लेख किया कि यह उनकी 1420वीं कथा है, जो सीता जन्मभूमि पर आयोजित हो रही है। उन्होंने जीवनभर माता सीता की कथा सुनाने का संकल्प दोहराया।
इस अवसर पर संयोजक राम शंकर शास्त्री, रघुनाथ तिवारी, राम छबीला चौधरी, राधेश्याम शर्मा, दिलीप शाही, शंकर सुशील सुंदरका, शैलेन्द्र सिंह सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।


