Patna News:- बिहार के मौजूदा उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर समय-समय पर उम्र, नाम और शैक्षणिक योग्यता को लेकर विवाद उठते रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में इन मुद्दों पर लगातार चर्चाएँ होती रही हैं।
सबसे पहले 1999 में उनकी जन्मतिथि को लेकर बड़ा विवाद सामने आया था। उस समय राज्यपाल सूरज भान ने जन्मतिथि में असंगति को आधार बनाकर उन्हें मंत्री पद से हटा दिया था। कहा जाता है कि अलग-अलग दस्तावेज़ों में उनकी उम्र अलग-अलग बताई गई थी।
सम्राट चौधरी के नाम को लेकर भी सवाल उठे। जन्म के समय उनका नाम राकेश कुमार बताया गया, जिसे बाद में राकेश कुमार मौर्य, फिर सम्राट चंद्र मौर्य और अंततः सम्राट चौधरी के रूप में बदला गया। विपक्षी दलों का आरोप है कि नाम और उम्र बदलने का मकसद कानूनी कार्रवाई से बचना था।
साल 1998 में कांग्रेस नेता सदानंद सिंह की एक बैठक के दौरान बम विस्फोट की घटना हुई थी, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में सम्राट चौधरी का नाम सामने आया और वे छह महीने जेल में भी रहे। हालांकि, बाद में कोर्ट में प्रस्तुत दस्तावेज़ों के आधार पर उन्हें नाबालिग माना गया और उनका नाम मामले से हटा दिया गया।
इसके अलावा, उनके चुनावी हलफनामों में उम्र के अंतर को लेकर भी विरोधियों ने सवाल उठाए हैं। कभी 26 वर्ष, कभी 28 वर्ष और बाद में 51 वर्ष बताई गई उम्र को लेकर विवाद होता रहा।
शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी विवाद सामने आया। 2020 के हलफनामे में उन्होंने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से डी.लिट. की डिग्री होने का दावा किया, जबकि विपक्ष ने इसे फर्जी बताया। कुछ समय पहले कोर्ट में दिए गए बयान में खुद उन्होंने कहा था कि वे मैट्रिक परीक्षा पास नहीं कर सके थे।
हालांकि, इन सभी विवादों के बावजूद सम्राट चौधरी बिहार की राजनीति में लगातार सक्रिय रहे हैं और वर्तमान में भाजपा के बड़े नेताओं में गिने जाते हैं।


