Bihar News : बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में मंगलवार को नर्सों की अचानक हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो गईं। नर्सों के एक साथ काम बंद करने से अस्पताल की इमरजेंसी सेवाएं बाधित हो गईं, जबकि वार्डों में भर्ती मरीजों को समय पर दवाएं, इंजेक्शन और अन्य जरूरी उपचार नहीं मिल सके। इससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
पूरा विवाद अस्पताल की वरिष्ठ स्टाफ नर्स लक्ष्मी कुमारी के पति अरविंद कुमार सिंह की इलाज के दौरान हुई मौत के बाद शुरू हुआ। अरविंद कुमार सिंह दमा की बीमारी से पीड़ित थे और 2 जुलाई को उन्हें PMCH के इमरजेंसी वार्ड से पुराने MICU में भर्ती कराया गया था।
मृतक के बेटे शिवम कुमार का आरोप है कि इलाज के दौरान दी गई दवा के रिएक्शन से उनके पिता की हालत लगातार बिगड़ती गई। उनका कहना है कि ऑक्सीजन लेवल गिरने के बावजूद कई बार डॉक्टरों को बुलाने की कोशिश की गई, लेकिन समय पर उचित चिकित्सा नहीं मिल सकी। परिजनों का आरोप है कि इलाज में लापरवाही के कारण मरीज की जान चली गई।
परिवार का यह भी दावा है कि जब उन्होंने डॉक्टरों की अनुपस्थिति का वीडियो बनाना चाहा तो वहां मौजूद कुछ पीजी (जूनियर) डॉक्टर नाराज हो गए। आरोप है कि शिवम और उनके भाई को इमरजेंसी वार्ड के एक कमरे में ले जाकर मारपीट की गई। बीच-बचाव करने पहुंचीं उनकी मां और वरिष्ठ स्टाफ नर्स लक्ष्मी कुमारी के साथ भी कथित तौर पर बदसलूकी और हाथापाई की गई।
इस घटना के विरोध में मंगलवार सुबह से बड़ी संख्या में नर्सें इमरजेंसी वार्ड के बाहर प्रदर्शन पर बैठ गईं। भारी बारिश के बावजूद नर्सों ने छाता लेकर अस्पताल प्रशासन के खिलाफ धरना जारी रखा। प्रदर्शनकारी नर्सों की मांग है कि मारपीट के आरोपित डॉक्टरों के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज सार्वजनिक कर पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जाए।
स्थिति बिगड़ने पर अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारी नर्सों से बातचीत कर काम पर लौटने की अपील की। हालांकि नर्सें अपनी मांगों पर कायम रहीं और न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही।
फिलहाल हड़ताल का सबसे अधिक असर अस्पताल में भर्ती मरीजों पर पड़ रहा है। स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने से इलाज की रफ्तार धीमी हो गई है। अब सभी की नजर अस्पताल प्रशासन की अगली कार्रवाई और जांच के नतीजों पर टिकी हुई है।


