Bihar News: बिहार के नवादा जिले में रजौली थाना क्षेत्र के सवैयाटांड़ इलाके में अभ्रक और पत्थर के अवैध खनन का कारोबार तेजी से फैलता जा रहा है। करोड़ों रुपये के इस अवैध कारोबार को लेकर प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में लंबे समय से अवैध खनन धड़ल्ले से जारी है, लेकिन जिम्मेदार विभाग के अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार सवैयाटांड़ और आसपास के सेंचुरी क्षेत्र में बड़ी संख्या में मजदूर अपनी जान जोखिम में डालकर पहाड़ों और खदानों से अभ्रक तथा पत्थर निकालने का काम कर रहे हैं। इन मजदूरों को दिनभर कठिन परिश्रम के बावजूद बेहद कम मजदूरी मिलती है। दूसरी ओर खनिज संपदा को झारखंड ले जाकर ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है, जिससे अवैध कारोबार से जुड़े लोगों को भारी मुनाफा हो रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक कार्रवाई अक्सर गरीब मजदूरों और छोटे स्तर के लोगों तक ही सीमित रहती है, जबकि पूरे नेटवर्क के असली सरगना और बड़े कारोबारी कार्रवाई से बच निकलते हैं। बेरोजगारी और आर्थिक तंगी के कारण इलाके के कई मजदूर मजबूरी में इस अवैध कारोबार से जुड़ रहे हैं।
अवैध खनन के कारण पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। लगातार पहाड़ों की कटाई और अवैध विस्फोट से आसपास के गांवों में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग की ओर से कई स्थानों पर चेक नाके बनाए गए हैं, लेकिन उनका कोई खास असर देखने को नहीं मिल रहा। खनिज सामग्री खुलेआम झारखंड तक पहुंचाई जा रही है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अवैध खनन में शामिल असली संचालकों और मुनाफाखोर कारोबारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो पर्यावरण को और अधिक नुकसान होगा तथा गरीब मजदूरों का शोषण लगातार बढ़ता जाएगा।
जिला अधिकारी Ravi Prakash ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि जंगल क्षेत्रों में हो रहे अवैध खनन को रोकने के लिए छापेमारी अभियान चलाया गया है। उन्होंने बताया कि वन पदाधिकारी के नेतृत्व में विशेष कार्रवाई दल का गठन किया गया है और जल्द ही अवैध खनन पर लगाम लगाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।


