Jharkhand News: झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन जेपीएससी (झारखंड लोक सेवा आयोग) परीक्षा विवाद को लेकर सियासी तापमान चरम पर पहुंच गया। गुरुवार को सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले एनडीए के विधायकों ने विधानसभा परिसर में जोरदार प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शन के दौरान भाजपा विधायकों ने हाथों में तख्तियां लेकर जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों का समर्थन किया और मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग उठाई।
प्रदर्शन में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, भाजपा के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल, विधायक डॉ. नीरा यादव, उज्ज्वल दास समेत एनडीए के कई विधायक शामिल हुए। विपक्षी नेताओं ने सरकार पर परीक्षा प्रक्रिया में हुई कथित गड़बड़ियों को दबाने का आरोप लगाया और कहा कि छात्रों के भविष्य से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
विधायक डॉ. नीरा यादव ने कहा कि जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं से राज्य के लाखों अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सीआईडी जांच के जरिए मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। उनका कहना था कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच केवल सीबीआई ही कर सकती है। उन्होंने 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग भी की।
वहीं, विपक्ष के आरोपों पर राज्य सरकार की ओर से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि भाजपा को पहले अपने शासनकाल में हुई कथित गड़बड़ियों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि जिन मामलों की सीबीआई जांच पहले हुई, उनके नतीजे सबके सामने हैं, इसलिए विपक्ष इस मुद्दे पर केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है।
मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा कि राज्य सरकार छात्रों की भावनाओं को गंभीरता से समझ रही है और उनकी मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार ने इस मामले में मंत्रियों की एक टीम को जिम्मेदारी सौंपी है और आंदोलनरत छात्रों के साथ वार्ता की प्रक्रिया भी जारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बातचीत के जरिए जल्द ही सकारात्मक समाधान निकलेगा।
जेपीएससी विवाद को लेकर विधानसभा के बाहर शुरू हुई सियासी जंग अब सदन के भीतर भी तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। एक ओर विपक्ष सीबीआई जांच और मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ा है, तो दूसरी ओर सरकार संवाद और जांच के जरिए समाधान निकालने का दावा कर रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा झारखंड की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बना रह सकता है।


