Jharkhand News: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में एक बड़ा हादसा टल गया, जब स्वर्णरेखा नदी के तट पर मिले द्वितीय विश्व युद्ध के 227 किलोग्राम वजनी शक्तिशाली अमेरिकी बम को भारतीय सेना द्वारा सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय कर दिया गया। यह घटना बहरागोड़ा प्रखंड के पानीपाड़ा-नागुडसाई गांव की है, जहां बुधवार को सेना ने हाई-रिस्क ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
जानकारी के अनुसार, यह बम अमेरिकी एएन-एम 64 मॉडल का था, जिसे दशकों पुराना और बेहद खतरनाक माना गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह बम अनियंत्रित रूप से फट जाता, तो आसपास के बड़े इलाके में भारी तबाही हो सकती थी। इस खतरे को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत सेना की मदद ली।
भारतीय सेना की 51 इंजीनियर रेजिमेंट (रांची) की विशेष टीम ने मौके पर पहुंचकर पूरे क्षेत्र का गहन निरीक्षण किया। ऑपरेशन का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल धर्मेंद्र सिंह और कैप्टन आयुष कुमार सिंह ने किया। उनके साथ प्रशिक्षित तकनीकी टीम के कई सदस्य भी मौजूद रहे, जिन्होंने अत्याधुनिक तकनीक और सावधानी के साथ इस मिशन को पूरा किया।
बम को निष्क्रिय करने के लिए एक विशेष रणनीति अपनाई गई। इसे करीब 10 फीट गहरे गड्ढे में रखकर चारों तरफ बालू से भरी बोरियों का मजबूत घेरा बनाया गया, ताकि विस्फोट का असर सीमित रहे। पूरी प्रक्रिया को लगभग एक किलोमीटर दूर बनाए गए कंट्रोल प्वाइंट से संचालित किया गया।
ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। प्रशासन ने एक किलोमीटर के दायरे को पूरी तरह सील कर दिया और आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई। आसपास के ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया। पुलिस और प्रशासन की निगरानी में पूरे इलाके को सुरक्षित रखा गया। एहतियात के तौर पर कलईकुंडा एयरफोर्स स्टेशन से उड़ानों को भी कुछ समय के लिए रोक दिया गया।
बताया जा रहा है कि 17 मार्च को स्थानीय मछुआरों ने नदी में मछली पकड़ने के दौरान एक संदिग्ध सिलेंडरनुमा वस्तु देखी थी। इसकी सूचना प्रशासन को दी गई, जिसके बाद जांच में यह बम निकला। तत्परता दिखाते हुए सेना को बुलाया गया और योजना बनाकर इसे सुरक्षित रूप से निष्क्रिय किया गया।
इस पूरे अभियान में जिला प्रशासन, पुलिस और सेना के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला, जिससे बिना किसी जनहानि या नुकसान के इस बड़े खतरे को टाल दिया गया। फिलहाल सेना की टीम आसपास के क्षेत्र में और जांच कर रही है, ताकि किसी अन्य विस्फोटक की मौजूदगी का पता लगाया जा सके।


