रांची, 10 सितंबर (हि.स.)। कभी नक्सली हिंसा, बारूदी सुरंगों और लेवी वसूली के लिए पहचाने जाने वाले झारखंड में अब हालात काफी बदल चुके हैं। वर्षों तक चले नक्सल विरोधी अभियानों के बाद जंगलों में उग्रवादी गतिविधियां काफी सीमित हुई हैं। कई बड़े नक्सली कमांडर मारे गए या गिरफ्तार हुए, जबकि बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा का रास्ता अपनाया है।
झारखंड पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से अब तक नक्सल विरोधी अभियान के दौरान 113 नक्सली गिरफ्तार किए गए हैं। इनमें 49 माओवादी, 30 पीएलएफआई, 23 टीएसपीसी, 10 जेजेएमपी और एक एसजेएमएम सदस्य शामिल हैं। इसी अवधि में 50 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जबकि मुठभेड़ में 22 माओवादी मारे गए। अभियानों के दौरान 111 हथियार और करीब 9,904 कारतूस भी बरामद किए गए।
पुलिस का कहना है कि झारखंड में नक्सलवाद लगभग समाप्ति की ओर है। हालांकि, अपराध की चुनौती पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अब इसका स्वरूप और ठिकाना बदल गया है। जंगलों में नक्सलियों द्वारा की जाने वाली लेवी वसूली की जगह शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों में संगठित आपराधिक गिरोह रंगदारी, जमीन, कोयला-बालू, निर्माण और ठेकेदारी के कारोबार में प्रभाव जमाने की कोशिश कर रहे हैं।
पुलिस मुख्यालय के अनुसार जनवरी से अब तक संगठित आपराधिक गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई में 193 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। उनके पास से 63 हथियार और 274 गोलियां बरामद हुईं। इसके अलावा 47 अपराधियों को जिला बदर किया गया और नौ के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया।
पुलिस अब केवल अपराधियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहना चाहती। संगठित अपराध की आर्थिक रीढ़ पर भी प्रहार करने की तैयारी है। कुख्यात अपराधियों की चल-अचल संपत्ति, बैंक खातों, आर्थिक लेन-देन और उनसे जुड़े लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि अपराध से कमाया गया पैसा कहां लगाया जा रहा है और नेटवर्क को आर्थिक मदद कौन उपलब्ध करा रहा है।
पुलिस के मुताबिक संगठित गिरोहों से जुड़े 150 से अधिक लोगों की प्रोफाइल तैयार की जा चुकी है। इसमें अपराधियों के साथ उनके सहयोगियों, आर्थिक मददगारों और संरक्षण देने वालों की जानकारी भी शामिल की जा रही है। एटीएस की टीमें संदिग्ध अपराधियों के घरों तक पहुंचकर भौतिक सत्यापन कर रही हैं।
इसके साथ ही पुलिस एक डिजिटल डेटाबेस भी तैयार कर रही है, जिसमें अपराधियों के रिकॉर्ड के साथ उनके सहयोगियों, संपत्ति, बैंक खातों और आपराधिक नेटवर्क से जुड़ी जानकारी दर्ज होगी।
बदलती चुनौती से निपटने के लिए पुलिस आधुनिकीकरण पर भी जोर दिया जा रहा है। वर्ष 2026 में झारखंड पुलिस को 636 चारपहिया और 849 दोपहिया वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं, 627 चारपहिया और 848 दोपहिया वाहनों की खरीद के आदेश भी जारी किए गए हैं।
कुल मिलाकर झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। अब अगली चुनौती संगठित अपराध के उस नेटवर्क को खत्म करना है, जो हथियार, पैसा, जमीन, कारोबार और संरक्षण के सहारे अपना प्रभाव बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। पुलिस की रणनीति साफ है—अब लड़ाई सिर्फ अपराधी से नहीं, बल्कि उसके पूरे नेटवर्क और आर्थिक स्रोत से होगी।


