Jharkhand News: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से जेपीएससी, जेएसएससी-सीजीएल और टीडीपीएल एजेंसी से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा के बाद सीजीएल के माध्यम से नियुक्त अधिकारियों और कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ गई है। मंगलवार को बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने प्रोजेक्ट भवन परिसर में प्रदर्शन किया। शाम को धुर्वा स्थित प्रोजेक्ट भवन के बाहर भी कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर विरोध जताया। तेज बारिश के बावजूद कर्मचारी प्रदर्शन स्थल पर डटे रहे।
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना था कि सरकार की ओर से अभी केवल परीक्षा रद्द करने की मौखिक घोषणा की गई है। उन्हें अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक अधिसूचना या विभागीय आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। कर्मचारियों ने कहा कि जब तक सरकार की ओर से लिखित आदेश जारी नहीं होता, वे पहले की तरह अपने-अपने कार्यालयों में पहुंचकर नियमित कामकाज करते रहेंगे।
नौकरी पर कार्रवाई हुई तो आंदोलन की चेतावनी
कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी सेवाएं समाप्त करने या कार्यालय में काम करने से रोकने की कार्रवाई की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जरूरत पड़ने पर प्रोजेक्ट भवन से विधानसभा तक मार्च किया जाएगा। उन्होंने सरकार से जल्द स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
कर्मचारियों का कहना है कि उनकी नियुक्ति सीजीएल परीक्षा की प्रक्रिया पूरी होने के बाद हुई थी। परीक्षा को लेकर पहले विवाद सामने आने के बाद मामले की सीआईडी जांच भी कराई गई थी। उनका दावा है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नियुक्तियां की गईं। ऐसे में अचानक परीक्षा रद्द कर उनकी सेवा पर असर डालना उचित नहीं है।
केंद्रीय नौकरी छोड़कर ज्वाइन की थी सेवा
प्रदर्शन कर रहे कई कर्मचारियों ने कहा कि उन्होंने सीजीएल के माध्यम से झारखंड सरकार की नौकरी पाने के लिए केंद्रीय स्तर की नौकरियां तक छोड़ दी थीं। अब परीक्षा रद्द किए जाने की घोषणा से उनके सामने नौकरी और भविष्य को लेकर गंभीर अनिश्चितता पैदा हो गई है।
कर्मचारियों ने सवाल उठाया कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई थी तो उसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। लेकिन सभी नियुक्त कर्मचारियों को एक साथ प्रभावित करना उचित नहीं होगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि किसी भी कार्रवाई से पहले कानूनी और प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट की जाए।
लिखित आदेश का इंतजार
कर्मचारियों ने कहा कि वे फिलहाल नियमित रूप से कार्यालय पहुंचकर काम करते रहेंगे। उनका कहना है कि जब तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक केवल मौखिक घोषणा के आधार पर नौकरी छोड़ना संभव नहीं है।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से उनकी सेवा, नियुक्ति और भविष्य को लेकर जल्द स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा।


