Motihari News: रक्सौल स्थित भारत-नेपाल सीमा पर पुलिस ने नशीली दवाओं की तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। शुक्रवार को की गई कार्रवाई में एक संदिग्ध कार से करीब 12 हजार प्रतिबंधित नशीले इंजेक्शन बरामद किए गए। बरामद इंजेक्शनों में नर्फिन, फेनारगन और डायजेपाम जैसी दवाएं शामिल हैं, जिनका दुरुपयोग आमतौर पर नशे के लिए किया जाता है।
पुलिस को पहले से गुप्त सूचना मिली थी कि आंध्र प्रदेश नंबर की एक कार के जरिए बड़ी मात्रा में नशीले इंजेक्शन नेपाल ले जाए जा रहे हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए रक्सौल थाना पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की योजना बनाई। महदेवा क्षेत्र में घेराबंदी कर संदिग्ध वाहन को रोका गया और उसकी सघन तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान कार से भारी मात्रा में नशीले इंजेक्शन बरामद हुए, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
इस अभियान का नेतृत्व थाना अध्यक्ष सह प्रशिक्षु आईपीएस हेमंत सिंह ने किया। उन्होंने बताया कि बरामद दवाएं प्रतिबंधित श्रेणी में आती हैं और इनका उपयोग अवैध नशे के रूप में किया जाता है। यह खेप नेपाल में खपाने के लिए ले जाई जा रही थी।
पुलिस ने मौके से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें वकील महतो (निवासी कलैया, जिला बारा, नेपाल) और पूरन ठाकुर (निवासी बीरगंज, जिला परसा, नेपाल) शामिल हैं। प्रारंभिक पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि वे लंबे समय से भारत-नेपाल सीमा का फायदा उठाकर नशीली दवाओं की तस्करी कर रहे थे। पुलिस के अनुसार, ये दोनों अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय तस्कर हैं और सीमा पार नेटवर्क के जरिए इस अवैध कारोबार को संचालित करते थे।
इस मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्स्टेंस एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों और सप्लायर्स की पहचान के लिए जांच जारी है।
पुलिस ने संकेत दिए हैं कि यह तस्करी का नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और सीमावर्ती क्षेत्रों में इसका गहरा प्रभाव हो सकता है। इस कार्रवाई को सीमा पार नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। वहीं, सुरक्षा एजेंसियां अब सीमा क्षेत्र में निगरानी और कड़ी करने की तैयारी में हैं, ताकि इस तरह की घटनाओं पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके।


