Bihar News : पटना। भोजपुर जिले के शाहपुर निवासी भरत तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत के मामले ने बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस प्रकरण को लेकर बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने स्वतंत्र जांच की पहल करते हुए एक विशेष समिति का गठन किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए समिति के सदस्यों को जल्द से जल्द घटनास्थल का दौरा कर वस्तुस्थिति की जानकारी जुटाने का निर्देश दिया है।
गठित जांच समिति में प्रेमचंद्र सिंह, असित नाथ तिवारी, हाजी मोहम्मद परवेज सिद्दिकी, उमेश राम, शशि पंडित, जितेंद्र पासवान और नीलम प्रवीण को शामिल किया गया है। समिति का मुख्य उद्देश्य घटना की वास्तविक परिस्थितियों की पड़ताल करना और पीड़ित परिवार से मुलाकात कर सभी पक्षों की जानकारी एकत्र करना है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि समिति स्थल निरीक्षण के बाद अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस कार्यालय को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर पार्टी आगे की रणनीति तय करेगी और आवश्यकता पड़ने पर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए संबंधित स्तर पर कार्रवाई की मांग करेगी।
राजेश राम ने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि भरत तिवारी जनहित के कई मुद्दों को उठाते रहे थे। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की कार्यशैली पर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन यदि उसने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था, तो उसके बाद गोली चलने की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह सवाल आम जनता के मन में भी उठ रहा है और इसका स्पष्ट जवाब सामने आना आवश्यक है।
कांग्रेस ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि इस मामले ने कानून व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रियाओं को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि मामले की निष्पक्ष जांच से ही सच्चाई सामने आएगी और जनता का विश्वास कायम रहेगा।
राजेश राम ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर नागरिक को न्याय पाने का अधिकार है। इसलिए भरत तिवारी मुठभेड़ मामले में सभी तथ्यों को सामने लाने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की जरूरत है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया पर जनता का भरोसा बना रहे।


