Bihar News : पटना। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव से पहले बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। जनसुराज पार्टी के कई पूर्व विधानसभा प्रत्याशी और प्रमुख नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्यता ग्रहण कर ली। इस राजनीतिक बदलाव को उपचुनाव से पहले जनसुराज के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, वहीं भाजपा इसे अपने बढ़ते जनाधार और संगठन की मजबूती का संकेत बता रही है।
पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम के दौरान प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने सभी नेताओं का अंगवस्त्र पहनाकर पार्टी में स्वागत किया। उन्होंने नए सदस्यों को संगठन के साथ मिलकर काम करने की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भाजपा लगातार समाज के हर वर्ग का विश्वास जीत रही है।
कार्यक्रम में सत्तारूढ़ दल के मुख्य सचेतक एवं दीघा विधायक संजीव चौरसिया समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी भी मौजूद रहे। इस मौके पर जनसुराज छोड़कर भाजपा में शामिल होने वालों में दीघा विधानसभा सीट से पूर्व प्रत्याशी बिट्टू सिंह, कुम्हरार से पूर्व प्रत्याशी प्रो. डॉ. केसी सिन्हा, मनेर विधानसभा सीट से पूर्व प्रत्याशी गोपाल सिंह तथा पटना नगर निगम की पूर्व महापौर प्रत्याशी विनीता सिंह सहित कई अन्य नेता और कार्यकर्ता शामिल रहे।
भाजपा की सदस्यता लेने के बाद प्रो. डॉ. केसी सिन्हा ने कहा कि वर्तमान समय में राष्ट्रहित सर्वोपरि है और देश को मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आज भारत वैश्विक स्तर पर नई पहचान बना रहा है और पूरी दुनिया की नजरें देश पर टिकी हैं। उन्होंने बिहार को ज्ञान और शिक्षा की भूमि बताते हुए कहा कि राज्य के विकास और देश को नई दिशा देने में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है। साथ ही भाजपा में शामिल करने के लिए प्रदेश नेतृत्व का आभार भी व्यक्त किया।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व, केंद्र सरकार की विकास योजनाओं और भाजपा की नीतियों से प्रभावित होकर विभिन्न दलों के नेता लगातार पार्टी से जुड़ रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि नए नेताओं के आने से संगठन और मजबूत होगा तथा आगामी विधानसभा चुनावों और उपचुनाव में भाजपा को इसका लाभ मिलेगा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव से ठीक पहले जनसुराज के कई प्रमुख नेताओं का भाजपा में शामिल होना चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि इसका वास्तविक असर मतदान के दौरान ही स्पष्ट होगा। फिलहाल इस घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है और सभी दलों की नजरें अब बांकीपुर उपचुनाव पर टिक गई हैं।


