Motihari News: जिले में साइबर पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मनी लॉन्ड्रिंग गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने 70 लाख रुपये से अधिक की भारतीय और नेपाली नकदी बरामद की है, साथ ही करीब 50 करोड़ रुपये मूल्य के USDT (क्रिप्टो करेंसी) के लेन-देन का खुलासा हुआ है। इस गिरोह के तार नेपाल समेत कई अन्य देशों से जुड़े पाए गए हैं, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।
पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात के निर्देशन में साइबर डीएसपी अभिनव पराशर के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया था। टीम को भारत-नेपाल सीमा से सटे इलाकों में अवैध नकदी और डिजिटल करेंसी के लेनदेन की गुप्त सूचना मिली थी। इसके बाद घोड़ासहन और ढाका थाना क्षेत्रों में कई घंटों तक छापेमारी की गई। इस दौरान पुलिस ने सुरेंद्र प्रसाद, विक्रम कुमार, प्रेमसागर कुमार और गंगासागर कुमार को हिरासत में लिया।
छापेमारी के दौरान आरोपियों के पास से 56.71 लाख रुपये भारतीय मुद्रा और 13.67 लाख नेपाली मुद्रा, 11 मोबाइल फोन, एक कैश काउंटिंग मशीन, दो पॉस मशीन, कंप्यूटर सिस्टम और कई बैंक खातों व ई-केवाईसी से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए। बरामद मोबाइल में कई बैंकिंग ऐप्स और क्रिप्टो वॉलेट्स सक्रिय पाए गए, जो इस पूरे नेटवर्क के संचालन में इस्तेमाल हो रहे थे।
जांच में सामने आया कि यह गिरोह ‘म्यूल अकाउंट्स’ यानी दूसरों के नाम पर खोले गए बैंक खातों का इस्तेमाल करता था। इन खातों के जरिए अवैध पैसे को पहले इकट्ठा किया जाता और फिर क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजैक्शन के माध्यम से नेपाल भेजा जाता था। इसके बाद क्रिप्टो एक्सचेंज जैसे Binance का उपयोग कर इस पैसे को डिजिटल करेंसी में बदला जाता था, जिससे इसकी ट्रैकिंग मुश्किल हो जाए।
डीएसपी पराशर के अनुसार, गिरोह ने करीब 6 मिलियन USDT का लेनदेन किया है। आरोपियों ने अपने इस अवैध कारोबार को छुपाने के लिए बाजार में साधारण दुकानों का सहारा लिया था, लेकिन इनके जरिए वे ट्रेडिंग ऐप्स, क्रिप्टो एक्सचेंज और सीएसपी सेवाओं का उपयोग कर करोड़ों रुपये की हेराफेरी कर रहे थे।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपियों के कई बैंक खाते पहले से ही फ्रीज हैं, जो उनकी संदिग्ध गतिविधियों की पुष्टि करते हैं। फिलहाल पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने और वित्तीय स्रोतों की जांच में जुटी हुई है।


