Ranchi News:- एक हजार करोड़ रुपये के शराब घोटाले में गिरफ्तार आईएएस अधिकारी विनय चौबे को आखिरकार एसीबी कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। कोर्ट ने सोमवार को उन्हें 187 (2) बीएनएस के तहत जमानत प्रदान कर दी। हालांकि, जमानत की शर्तों में कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि चौबे राज्य से बाहर जाने से पहले इसकी जानकारी कोर्ट को देंगे और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अपना मोबाइल नंबर भी नहीं बदल पाएंगे। साथ ही उन्हें 25 हजार रुपये का निजी मुचलका जमा करना होगा।
गौरतलब है कि विनय चौबे करीब 92 दिनों तक जेल में रहे। इस दौरान एसीबी उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी, जिसके चलते उन्हें जमानत मिल पाई। बता दें कि इसी साल 20 मई को एसीबी ने चौबे को पूछताछ के लिए बुलाया था। पूछताछ के दौरान ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। गिरफ्तारी के बाद राज्य सरकार ने उन पर लगे गंभीर आरोपों के चलते उन्हें निलंबित कर दिया था।
इस मामले में जमानत मिलने के तुरंत बाद राजनीति भी गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एसीबी और राज्य सरकार पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि एसीबी ने जानबूझकर 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं की ताकि विनय चौबे की जमानत का रास्ता आसान हो सके। मरांडी ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पूर्व सचिव की गिरफ्तारी की साजिश रची, ताकि ईडी की चल रही जांच प्रभावित हो और शराब घोटाले से जुड़े अहम सबूत मिटाए जा सकें।
शराब घोटाला मामला झारखंड की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। अब जबकि चौबे को जमानत मिल गई है, इस पूरे प्रकरण पर विपक्ष हमलावर हो गया है। आने वाले दिनों में यह मामला राज्य की राजनीति में और भी ज्यादा हलचल पैदा कर सकता है।

