Bhagalpur News: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को भागलपुर पहुंचकरविक्रमशिला पुल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य आगामी 30 नवंबर तक पुल पर आवागमन को पुनः बहाल करना है। पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत और तकनीकी जांच का कार्य तेजी से किया जा रहा है ताकि लोगों को जल्द से जल्द राहत मिल सके।
निरीक्षण के दौरान सम्राट चौधरी ने बताया कि विक्रमशिला पुल को दोबारा चालू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुल के सुपरस्ट्रक्चर की जांच दो विशेषज्ञ एजेंसियों द्वारा की जा चुकी है, जबकि एक तीसरी एजेंसी भी तकनीकी मूल्यांकन करेगी। तीसरी एजेंसी की रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
उन्होंने बताया कि फिलहाल पुल के तीन क्षतिग्रस्त स्लैब बदले जाएंगे। मरम्मत कार्य पूरा होने तक लोगों की आवाजाही सुचारू रखने के लिए अस्थायी व्यवस्था के तहत बेली ब्रिज का संचालन जारी रहेगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि बेली ब्रिज से गुजरने वाले वाहनों से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा।
विक्रमशिला पुल बिहार के पूर्वी हिस्से के लिए एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद भागलपुर और आसपास के जिलों के लोगों को आवागमन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में सरकार द्वारा निर्धारित समयसीमा के भीतर पुल को चालू करने की घोषणा को क्षेत्र के लोगों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
पुल निरीक्षण के बाद सम्राट चौधरी भागलपुर कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां उन्होंने जिले के विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। कुल 203 करोड़ रुपये की लागत से पूरी हो चुकी और प्रस्तावित 84 विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया गया। इन योजनाओं में सड़क निर्माण, भवन निर्माण, पेयजल आपूर्ति, शिक्षा और अन्य आधारभूत संरचना से जुड़े कई कार्य शामिल हैं।
इन परियोजनाओं के पूरा होने से जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होगा तथा लोगों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी में विकास कार्यों की जानकारी भी साझा की गई।
इसके बाद मुख्यमंत्री स्तर की समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में चल रही विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए ताकि आम जनता को उनका लाभ समय पर मिल सके।


