रांची: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं और छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहा आंदोलन शुक्रवार को उस समय विवाद में बदल गया, जब रांची, हजारीबाग और गिरिडीह में मुख्यमंत्री का पुतला दहन करने पहुंचे छात्रों और सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों के बीच कथित तौर पर झड़प हो गई। प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर तनाव की स्थिति बनी रही। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया।
रांची के एल्बर्ट एक्का चौक पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि कुछ लोगों ने उनके हाथ से पुतला और मशाल छीनने का प्रयास किया। इसी दौरान प्रदर्शन में शामिल एक छात्रा के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। घटना के बाद प्रदर्शनकारियों ने एक युवक को पकड़ लिया और उसके साथ भी मारपीट की। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और एक युवक को हिरासत में लेकर स्थिति संभाली।
उधर, गिरिडीह और हजारीबाग में भी छात्रों ने झामुमो कार्यकर्ताओं पर प्रदर्शन में बाधा डालने और उनके साथ मारपीट करने का आरोप लगाया। छात्रों के मुताबिक, दोनों स्थानों पर विवाद बढ़ने के बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। पुलिस की मौजूदगी में स्थिति को नियंत्रित किया गया।
यह प्रदर्शन जेपीएससी-जेएसएससी सुधार मंच से जुड़े छात्रों की ओर से आयोजित किया गया था। छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े फैसलों और आंदोलन के मुद्दों को लेकर वे लंबे समय से अपनी मांगों को उठा रहे हैं। इसी क्रम में राज्य के विभिन्न हिस्सों में मुख्यमंत्री और अन्य नेताओं के पुतले दहन का कार्यक्रम रखा गया था।
इस बीच नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने छात्रों के साथ कथित मारपीट की घटना को शर्मनाक बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि रांची, हजारीबाग और गिरिडीह में शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर झामुमो समर्थकों ने हमला किया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले युवाओं को दबाने का प्रयास बताया।
मरांडी ने कहा कि छात्रों का आंदोलन सरकार के फैसलों के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से चल रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि गिरिडीह और हजारीबाग में छात्रों के साथ मारपीट की गई और रांची में भी प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाया गया। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया का उल्लेख उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
नेता प्रतिपक्ष ने पुलिस-प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर दोषियों की पहचान करने और कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलन के दौरान हिंसा की घटनाएं राज्य के लिए उचित संकेत नहीं हैं। उन्होंने सरकार से छात्रों की समस्याओं का समाधान बातचीत के माध्यम से करने की अपील भी की।
प्रदर्शन के दौरान हुए विवाद के बाद तीनों जिलों में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। अब पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।


