Patna News: बिहार की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जीत दर्ज करने के बाद जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। लंबे समय तक देश के चर्चित चुनावी रणनीतिकार के रूप में पहचान बनाने वाले प्रशांत किशोर ने अब सक्रिय राजनीति में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा दी है। इस जीत के साथ उन्होंने रणनीतिकार से जनप्रतिनिधि बनने तक का महत्वपूर्ण सफर तय किया है।
प्रशांत किशोर का जन्म 20 मार्च 1977 को बिहार के रोहतास जिले के कोनार गांव में हुआ था। हालांकि उनका बचपन और शुरुआती शिक्षा मुख्य रूप से बक्सर में हुई। उनके पिता डॉ. श्रीकांत पांडेय सरकारी चिकित्सक थे, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। सरकारी सेवा के कारण परिवार लंबे समय तक बक्सर और शाहपुर में रहा। आज भी उनका पैतृक घर बक्सर में है और परिवार के सदस्य वहीं रहते हैं। राजनीति में सक्रिय रहने के बावजूद उनका अपने गृह क्षेत्र से जुड़ाव बना हुआ है।
परिवार की बात करें तो प्रशांत किशोर का परिवार सामान्य पृष्ठभूमि से आता है। सार्वजनिक जानकारी के अनुसार उनके चार भाई-बहन हैं। बड़े भाई अजय किशोर व्यवसाय से जुड़े हैं, जबकि अन्य सदस्य सार्वजनिक जीवन से दूर रहते हैं। उनकी पत्नी डॉ. जाह्नवी दास पेशे से चिकित्सक हैं और असम के गुवाहाटी की रहने वाली हैं। दोनों की मुलाकात संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के एक स्वास्थ्य कार्यक्रम के दौरान हुई थी, जो बाद में विवाह में बदल गई। दंपति का एक बेटा है, जिसका नाम दैबिक भारद्वाज है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी प्रशांत किशोर का सफर उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने पटना साइंस कॉलेज से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद लखनऊ विश्वविद्यालय से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (बीबीए) की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम किया और संयुक्त राष्ट्र के साथ कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं में योगदान दिया।
राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में उनकी पहचान वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान बनी, जब उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी के चुनाव अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद उन्होंने देश के कई राज्यों में विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं के लिए चुनावी रणनीति तैयार की और कई सफल अभियानों का हिस्सा बने।
बाद में उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखते हुए ‘जन सुराज’ अभियान की शुरुआत की। बिहार के गांव-गांव तक पहुंचकर उन्होंने विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुशासन को अपनी राजनीति का केंद्र बनाया। इसी अभियान ने आगे चलकर जन सुराज को राजनीतिक दल का रूप दिया।
बांकीपुर उपचुनाव में मिली जीत को प्रशांत किशोर के राजनीतिक जीवन का बड़ा पड़ाव माना जा रहा है। इस जीत ने उन्हें केवल चुनावी रणनीतिकार नहीं, बल्कि जनता के जनादेश से चुने गए जननेता के रूप में स्थापित किया है। अब बिहार की राजनीति में उनकी आगामी भूमिका और जन सुराज के भविष्य पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।


