Patna News:- बिहार में लगातार हो रही भारी बारिश और नेपाल से छोड़े गए पानी के कारण कई जिले बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। कई पंचायतों में पानी भर जाने से लोगों का जीवन कठिन हो गया है। लोग सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं। सरकारी राहत सामग्री कुछ क्षेत्रों तक पहुंच रही है, जबकि कई जगह अब भी सहायता नहीं पहुंच पाई है।
भारी बारिश और बाढ़ ने पटना, भागलपुर, बेगूसराय सहित सात जिलों को लगभग टापू बना दिया है। गंगा, कोसी, बागमती, बूढ़ी गंडक, पुनपुन, घाघरा, सोन, कमला, अधवारा और कनकाई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। अब तक करीब 18 लाख लोग प्रभावित हो चुके हैं और कई जानें जा चुकी हैं।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने उत्तर बिहार के आठ जिलों—सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा, सहरसा और मधुबनी—में भारी बारिश के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। साथ ही, सीतामढ़ी, शिवहर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण समेत 11 जिलों में येलो अलर्ट लागू है। दक्षिण बिहार के 19 जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है।
पिछले 24 घंटों में शिवहर में सर्वाधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि कटिहार में 140 मिमी, नालंदा में 70 मिमी और पटना में 57 मिमी वर्षा हुई। मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी से आ रही नम हवाओं के कारण 14 अगस्त तक भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा।
राजधानी पटना में गंगा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है—दीघा घाट पर 51.62 मीटर और गांधी घाट पर 50.20 मीटर। भागलपुर में सुल्तानगंज के पास गंगा का पानी एनएच-80 पर पहुंच जाने से यातायात बंद हो गया है। नवगछिया में 15 करोड़ रुपये की लागत से बना रिंग बांध का 70% हिस्सा बह जाने से गोपालपुर प्रखंड में स्थिति और गंभीर हो गई है।
बेगूसराय में 137 स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र 14 अगस्त तक बंद कर दिए गए हैं। फसलों को भी भारी नुकसान हुआ है। राहत और बचाव के लिए एनडीआरएफ और आपदा प्रबंधन विभाग की 14 टीमें विभिन्न जिलों में तैनात हैं। पटना में 35 नावें, भागलपुर में राहत शिविर, सामुदायिक रसोई और मेडिकल कैंप सक्रिय हैं। प्रशासन ने पुनपुन नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।


