Today Post News: करवा चौथ का त्योहार इस बार व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए मौसम के कारण थोड़ी चिंता बढ़ा सकता है। चक्रवाती तूफान अरनब के कारण देश के कई हिस्सों में 29 अक्टूबर को बादल छाने और बारिश होने की संभावना जताई गई है। ऐसे में शाम के समय आसमान साफ नहीं रहने पर महिलाओं को चांद के दर्शन के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।
करवा चौथ विवाहित महिलाओं के लिए आस्था और परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं। परंपरा के अनुसार, चंद्रमा को अर्घ्य देने और पति का चेहरा देखने के बाद ही व्रत खोला जाता है। ऐसे में चांद का बादलों के पीछे छिपना व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।

चक्रवाती तूफान के असर से बदलेगा मौसम?
मौसम संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती तूफान के प्रभाव से देश के कुछ हिस्सों में मौसम बदलने की संभावना है। इसके असर से बादल छाने और बूंदाबांदी होने का अनुमान जताया गया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 29 और 30 अक्टूबर को कई इलाकाें में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। हालांकि, करवा चौथ की शाम को चांद दिखाई देगा या नहीं, यह उस समय के स्थानीय मौसम और बादलों की स्थिति पर निर्भर करेगा।
चांद नहीं दिखा तो क्या करेंगी महिलाएं?
चांद के दर्शन में देरी की आशंका के बीच महिलाएं अपनी पारिवारिक परंपराओं के अनुसार विकल्पों पर विचार कर रही हैं। कुछ महिलाओं का कहना है कि यदि चांद दिखाई नहीं देता है, तो वे अपने घर में प्रचलित रीति-रिवाजों का पालन करेंगी।
एक महिला के अनुसार, उनके परिवार में चांद नजर नहीं आने पर रात 12 बजे व्रत खोलने की परंपरा है। वहीं, एक अन्य महिला ने दूसरे शहरों में रहने वाले रिश्तेदारों से संपर्क किया है। उनकी योजना है कि वहां चांद दिखाई देने पर वीडियो कॉल के जरिए चंद्र दर्शन किए जाएं।
आस्था के साथ मौसम पर भी रहेगी नजर
करवा चौथ की शाम महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखती है। दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद सभी को चांद निकलने का इंतजार रहता है। मौसम खराब होने की स्थिति में यह इंतजार लंबा हो सकता है।
हालांकि, व्रत खोलने की परंपराएं परिवार, क्षेत्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। इसलिए चांद दिखाई नहीं देने की स्थिति में महिलाएं अपने परिवार की परंपरा या संबंधित धार्मिक मार्गदर्शन के अनुसार निर्णय ले सकती हैं।


