Jharkhand News : झारखंड के जामताड़ा जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था की एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। गोपालपुर गांव के एक गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण परिजनों को उसे खाट समेत ट्रैक्टर-ट्रॉली पर लादकर अस्पताल पहुंचाना पड़ा। हालांकि अस्पताल में इलाज शुरू होने के कुछ ही देर बाद उसकी मौत हो गई। घटना के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
मृतक की पहचान गोपालपुर निवासी मोनू टुडू के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार शुक्रवार देर रात उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। हालत गंभीर होते देख परिवार के लोगों ने तत्काल सरकारी 108 एंबुलेंस सेवा से संपर्क करने की कोशिश की। आरोप है कि कई बार फोन करने के बावजूद न तो कॉल का समुचित जवाब मिला और न ही समय पर एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई।
परिवार के लोगों का कहना है कि मरीज की स्थिति लगातार खराब होती जा रही थी। ऐसे में उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा। ग्रामीणों की मदद से मोनू टुडू को खटिया पर लिटाकर उसी खटिया सहित ट्रैक्टर-ट्रॉली पर रखा गया और जामताड़ा सदर अस्पताल के लिए रवाना किया गया। ग्रामीण इलाके से अस्पताल तक पहुंचने में काफी समय लग गया, जिससे मरीज की हालत और बिगड़ती चली गई।
सदर अस्पताल पहुंचने के बाद चिकित्सकों ने तत्काल उपचार शुरू किया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। इलाज के दौरान मोनू टुडू ने दम तोड़ दिया। मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और परिजनों का आक्रोश भी सामने आया।
मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया कि यदि समय पर एंबुलेंस उपलब्ध हो जाती और मरीज को जल्द अस्पताल पहुंचाया जाता, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। ग्रामीणों ने भी स्वास्थ्य विभाग की आपातकालीन सेवाओं की कार्यक्षमता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए एंबुलेंस सेवा जीवनरक्षक होती है, लेकिन जरूरत के समय सेवा नहीं मिलना बेहद चिंताजनक है।
घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी मिल चुकी है। उन्होंने स्वीकार किया कि 108 एंबुलेंस सेवा को लेकर कई शिकायतें सामने आ रही हैं। मंत्री ने कहा कि संबंधित चालक और जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही एंबुलेंस सेवा को और अधिक प्रभावी तथा जवाबदेह बनाने के लिए सरकार गंभीरता से काम कर रही है।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले की जांच कर रहा है। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की मांग की है।


