भुवनेश्वर : ओडिशा के पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा का शुभारंभ हो गया है। आस्था, भक्ति और परंपरा के इस अद्भुत पर्व में शामिल होने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचे हैं। भारी बारिश के बावजूद भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ और श्रद्धालु भगवान के रथों की पवित्र रस्सियां खींचने के लिए घंटों इंतजार करते नजर आए।
सुबह से ही पुरी की सड़कों पर भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। शंखनाद, घंटियों की आवाज और भगवान जगन्नाथ के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। मान्यता है कि भगवान के रथ की रस्सी खींचने से पुण्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है, इसी विश्वास के साथ लाखों श्रद्धालु इस दिव्य अवसर का हिस्सा बने।
इस वर्ष रथ यात्रा का समापन 27 जुलाई को नीलाद्री बीजे के साथ होगा। यात्रा से पहले पुरी मंदिर के सिंहद्वार पर भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के तीनों भव्य रथों को सजाया गया। भगवान जगन्नाथ के नंदीघोष रथ, भगवान बलभद्र के तालध्वज रथ और देवी सुभद्रा के दर्पदलन रथ की वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ विधिवत पूजा की गई।
रथों की सुरक्षा और धार्मिक परंपरा के तहत नंदीघोष रथ पर श्रीहनुमान, तालध्वज रथ पर भगवान नृसिंह और दर्पदलन रथ पर मां भुवनेश्वरी की स्थापना की गई। इसके बाद भगवान के विग्रहों को विशेष विधि-विधान के साथ रथों पर विराजमान कराया गया और गुंडिचा मंदिर की ओर यात्रा शुरू हुई।
जगन्नाथ रथ यात्रा में इस बार सांस्कृतिक रंग भी देखने को मिला। ओडिशी नृत्य कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह प्रस्तुति ओडिशा की समृद्ध संस्कृति और भगवान जगन्नाथ के प्रति भक्तों की गहरी आस्था का प्रतीक बनी।
इस खास मौके पर प्रसिद्ध गायक सोनू निगम भी पुरी पहुंचे और महाप्रभु जगन्नाथ के दर्शन किए। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले भगवान जगन्नाथ के लिए कई बार भजन गाए हैं, लेकिन पहली बार प्रत्यक्ष दर्शन का अनुभव उनके लिए बेहद भावुक करने वाला रहा। उन्होंने मंदिर की व्यवस्था और आयोजन की भी सराहना की।
रथ यात्रा का आकर्षण केवल भारत तक सीमित नहीं रहा। विदेशों से आए श्रद्धालुओं ने भी भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। वहीं, गुजरात के अहमदाबाद में भी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा धूमधाम से निकाली गई, जहां विशेष पूजा-अर्चना के साथ आयोजन हुआ।
पुरी जगन्नाथ मंदिर से जुड़े कई रहस्य भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। समुद्र के किनारे स्थित होने के बावजूद मंदिर के सिंहद्वार के भीतर प्रवेश करते ही समुद्र की तेज आवाज सुनाई नहीं देती, जिसे भक्त आध्यात्मिक अनुभव मानते हैं। मंदिर को लेकर यह मान्यता भी प्रसिद्ध है कि इसके ऊपर पक्षियों के उड़ने की घटना बेहद दुर्लभ है।
जगन्नाथ रथ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि भारत की प्राचीन परंपरा, संस्कृति और आस्था का विश्व प्रसिद्ध प्रतीक है, जिसमें हर साल लाखों लोग शामिल होकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।


