Bihar News : पटना। बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 87 हजार 383 करोड़ 43 लाख रुपये का अनुपूरक बजट सदन में पेश किया। वित्त मंत्री सह उपमुख्यमंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने विधानसभा में यह बजट प्रस्तुत किया। सरकार की ओर से पेश किए गए इस बजट में राज्य योजना मद के लिए 24 हजार 370.72 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि शेष राशि केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए निर्धारित की गई है।
मानसून सत्र के पहले दिन सरकार ने विभिन्न विभागों से जुड़े कुल 13 महत्वपूर्ण विधेयक भी सदन के पटल पर रखे। इन विधेयकों पर आगामी दिनों में चर्चा होगी और इसके बाद विधायी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। सरकार द्वारा पेश किए गए प्रमुख विधेयकों में बिहार नगर विकास विधेयक 2026, बिहार निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2026, बिहार ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक 2026, बिहार जुआ (प्रतिषेध) विधेयक 2026, बिहार माल एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक 2026 और बिहार भूमि दाखिल-खारिज (संशोधन) विधेयक 2026 शामिल हैं।
बिहार विधानमंडल का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 24 जुलाई तक चलेगा। पांच दिनों के इस सत्र में सरकार कई महत्वपूर्ण विधायी और वित्तीय प्रस्तावों को मंजूरी दिलाने की तैयारी में है। वहीं विपक्ष बेरोजगारी, शिक्षा, कानून व्यवस्था, महंगाई और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है।
सत्र के पहले दिन नीट पेपर लीक का मामला सबसे अधिक चर्चा में रहा। राष्ट्रीय जनता दल (राजद), कांग्रेस और वामपंथी दलों के विधायकों ने विधानसभा मुख्य द्वार से लेकर पोर्टिको तक मार्च निकाला और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विपक्षी नेताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
वामपंथी नेता अजय कुमार ने कहा कि नीट पेपर लीक, जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से जुड़े घटनाक्रम के विरोध में यह प्रदर्शन किया गया है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
राजद के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि नीट परीक्षा में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं, जिससे गरीब और मेधावी छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।
सदन में हंगामे और विरोध प्रदर्शन के बीच विधानसभा और विधान परिषद की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। अब मानसून सत्र के आगामी दिनों में बजट, विधेयकों और विपक्ष के उठाए गए मुद्दों पर जोरदार बहस देखने को मिल सकती है।


