Bhagalpur News: गंगा के बढ़ते जलस्तर ने भागलपुर जिले में बाढ़ की स्थिति को भयावह बना दिया है। दियारा और निचले इलाकों के बाद अब बाढ़ का पानी शहर और आसपास के रिहायशी क्षेत्रों में तेजी से फैल रहा है। गोराडीह प्रखंड के करीब दो दर्जन गांव जलमग्न हैं, जबकि शहर के नाथनगर, चंपानगर, बैंक कॉलोनी और दीपनगर महादलित बस्ती में भी लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। हजारों लोग बाढ़ की मार झेल रहे हैं।
गोराडीह में भागलपुर-गोराडीह मुख्य मार्ग पर जमसी के समीप करीब दो फीट पानी बह रहा है। तेज धार के बावजूद ग्रामीण पैदल और ऊंचे वाहनों के सहारे आवागमन करने को मजबूर हैं। जमसी, पिपरा, गोवर्धन पुल और मोहनपुर समेत कई गांवों में पानी घरों के अंदर तक पहुंच गया है। कई परिवार ऊंचे स्थानों और घरों के छज्जों पर शरण लेने को मजबूर हैं। कई सरकारी स्कूलों में पानी घुसने से पढ़ाई भी ठप हो गई है। वहीं, सैकड़ों एकड़ में लगी फसलें डूब चुकी हैं।
बाढ़ ने भागलपुर के सिल्क उद्योग को भी बड़ा झटका दिया है। नाथनगर और चंपानगर में पानी लूम वाले घरों तक पहुंच गया है। बुनकर बिजली की मोटर खोलकर ऊंचाई पर रख रहे हैं और महंगे सूत को भी पानी से बचाने की कोशिश कर रहे हैं। लूम बंद होने से कपड़ा उत्पादन ठप हो गया है। चंपानगर क्षेत्र में त्योहारी सीजन के लिए मिले करीब 20 से 25 लाख रुपये के ऑर्डर रद्द होने की स्थिति में हैं।
अल्पसंख्यक कल्याण विकास परिषद के प्रधान सचिव डॉ. अनवारूल हक अंसारी के अनुसार, चंपानगर के मस्जिद लेन, बोरिंग बाड़ी, मदनीनगर और कई गलियां पूरी तरह पानी में डूब चुकी हैं। करीब 5,000 लोग प्रभावित हैं और कई परिवार घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों या रिश्तेदारों के यहां जाने को मजबूर हैं।
शहर की बैंक कॉलोनी में भी हालात गंभीर हैं। पक्के मकानों के अंदर चार से पांच फीट तक पानी पहुंच गया है। कई घरों के बेडरूम तक पानी घुसने से फर्नीचर और जरूरी सामान बर्बाद हो गया है। वहीं वार्ड 21 की दीपनगर महादलित बस्ती में तीन से चार फीट पानी के बीच लोग जीवन गुजार रहे हैं। बाढ़ के पानी के साथ जहरीले कीड़े-मकोड़ों का खतरा भी बना हुआ है।
बाढ़ के कारण बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हुई है। रास्तों और गलियों में पानी भरा होने से स्कूल और ट्यूशन जाना मुश्किल हो गया है। पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से तत्काल राहत सामग्री, भोजन, नाव, राहत शिविर और सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि संकट बढ़ता जा रहा है, लेकिन अब तक पर्याप्त राहत नहीं पहुंची है।


