Bhagalpur News: भागलपुर के बाढ़ प्रभावित प्रखंडों में पानी अब स्थिर होने लगा है, लेकिन इसके घटने की रफ्तार बेहद धीमी है। कई इलाकों में चारों तरफ पानी फैला होने के कारण जनजीवन अब भी पटरी पर नहीं लौट पाया है। दियारा क्षेत्र के गांवों में आवागमन का प्रमुख साधन नाव बनी हुई है। सबसे ज्यादा परेशानी किसानों को है, जिनकी महीनों की मेहनत बाढ़ के पानी में बर्बाद हो गई है।
बाढ़ के कारण खेतों में खड़ी मक्का, धान, मिर्च और मौसमी सब्जियों की फसल को भारी नुकसान हुआ है। किसानों के अनुसार, अकेले पीरपैंती प्रखंड की 18 पंचायतों में करीब 5,600 हेक्टेयर फसल बाढ़ की चपेट में आ चुकी है। खेतों में पानी जमा रहने के कारण फसलें सड़ने लगी हैं। इससे किसानों के सामने परिवार के भरण-पोषण के साथ अगली फसल की तैयारी के लिए पूंजी जुटाने का संकट खड़ा हो गया है।
मोहनपुर मधुबन के किसान इन्द्रदेव मंडल और बाखरपुर के चरितर मंडल ने बताया कि बाढ़ ने उनकी पूरी मेहनत बर्बाद कर दी। मक्का और मिर्च की फसल खेत में ही सड़ गई। किसानों का कहना है कि दियारा क्षेत्र में हर साल बाढ़ का खतरा रहता है। इसके बावजूद खेती ही उनकी आय का मुख्य साधन है।
स्थानीय किसान वरुण यादव, गांधी तिवारी, प्रदीप सिंह, विनोद पांडे और कुंदन यादव के मुताबिक, क्षेत्र के अधिकांश किसान खेती के लिए किसान क्रेडिट कार्ड के अलावा महाजनों से भी कर्ज लेते हैं। बीज, खाद, खेत की जुताई और मजदूरी पर खर्च करने के बाद जब फसल तैयार होती है, तो बाढ़ उसे बहा ले जाती है। इससे किसान पुराने कर्ज के साथ नए कर्ज के बोझ में फंसते जाते हैं।
सबसे ज्यादा परेशानी बटाईदार किसानों को है। दूसरे की जमीन पर खेती करने वाले किसानों को खेती की लागत खुद उठानी पड़ती है और फसल होने पर जमीन मालिक को तय हिस्सा या रकम देनी होती है। इस बार फसल बर्बाद होने के बाद उनके पास न तो घर चलाने के लिए पर्याप्त अनाज बचा है और न ही अगली फसल की बुआई के लिए पैसा।
किसानों का कहना है कि बाढ़ के बाद सिर्फ फसल नुकसान का मुआवजा पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें दोबारा खेती शुरू करने के लिए आर्थिक मदद की जरूरत है। प्रभावित किसानों ने जिला प्रशासन से फसल क्षति का जल्द और उचित आकलन कराने की मांग की है।
किसानों ने सरकार से ऋण राहत, फसल का उचित मुआवजा तथा अगली फसल के लिए मुफ्त बीज और खाद उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि समय पर सहायता नहीं मिली तो बाढ़ से हुई फसल की तबाही लंबे समय तक आर्थिक संकट में बदल सकती है।


