Bhagalpur News: गंगा और कोसी के उफान ने भागलपुर जिले में इस साल भारी तबाही मचाई है। पिछले 27 घंटे में गंगा के जलस्तर में करीब 12 सेंटीमीटर की कमी जरूर आई है, लेकिन पानी घटने के साथ बर्बादी की तस्वीर सामने आने लगी है। जिला प्रशासन की प्रारंभिक समीक्षा में बुनियादी ढांचे, कृषि और सार्वजनिक संपत्ति को करीब 1,000 करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान लगाया गया है।
बाढ़ से जिले की 92 से अधिक पंचायतें, 376 गांव और 437 वार्ड प्रभावित हुए हैं। प्रशासन के अनुसार 9.50 लाख से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में आए हैं। दियारा और मैदानी इलाकों में धान, मक्का, सब्जी और नकदी फसलों को भारी नुकसान हुआ है। कई किसानों की पूरी लागत पानी में डूब गई है। किसानों का कहना है कि कर्ज लेकर की गई खेती बर्बाद होने से उनके सामने दोहरी आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है।
सड़क और तटबंध भी बाढ़ की चपेट में
बाढ़ का असर जिले के प्रमुख मार्गों पर भी पड़ा है। एनएच-80 पर भवनाथपुर के पास करीब दो फीट पानी जमा होने से कई दिनों तक आवागमन प्रभावित रहा। निर्माणाधीन मुंगेर-मिर्जाचौकी ग्रीनफील्ड फोरलेन पर भी पानी भर गया। नवगछिया के रंगरा चौक प्रखंड के बनिया गांव में कोसी के दबाव से पुरानी रेलवे लाइन का करीब 15 मीटर तटबंध टूट गया। इसके बाद आसपास के नए इलाकों में पानी फैल गया।
बाढ़ के बीच बाईपास थाना क्षेत्र के कोयली खटहा गांव में पानी से भरे गड्ढे में डूबने से एक ही परिवार के चार बच्चों समेत पांच लोगों की मौत हो गई। इस घटना ने राहत और बचाव व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं।
दियारा इलाकों में संपर्क टूटा
नाथनगर के रत्तीपुर, दिलदारपुर, भतोरिया सहित कई दियारा इलाकों का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। कई रास्तों पर पानी बहने से आवागमन ठप है। ग्रामीणों का आरोप है कि नावें समय पर नहीं पहुंच रही हैं। चापाकल डूबने से कई परिवार दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। दवाओं और बच्चों के दूध की भी कमी बताई जा रही है।
सबौर में ममलखा और रजंदीपुर तक बाढ़ का पानी फैला है। गोभी, कद्दू और हरी मिर्च जैसी फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। कहलगांव में भी निचले इलाकों और एनएच-80 के आसपास जलजमाव से यातायात और कारोबार प्रभावित हुआ है।
राहत के दावों और जमीनी हकीकत में अंतर
प्रशासन के अनुसार प्रभावित इलाकों में 317 से अधिक सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नवगछिया क्षेत्र का हवाई सर्वे कर राहत शिविरों का जायजा लिया है। प्रभारी मंत्री नीतीश मिश्रा ने भी समीक्षा बैठक कर पानी उतरने के बाद विस्तृत नुकसान का सर्वे कराने और प्रभावितों को सहायता देने की बात कही है।
हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि राहत सामग्री कई जगह मुख्य सड़कों तक ही सीमित है और दूरदराज के दियारा गांवों तक पर्याप्त मदद नहीं पहुंच रही। तटबंधों में गाद, जलनिकासी और निर्माणाधीन सड़कों की ऊंचाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि तत्काल राहत के साथ गाद प्रबंधन, जलनिकासी व्यवस्था और तटबंधों के स्थायी सुदृढ़ीकरण पर भी काम किया जाए, ताकि हर साल बाढ़ के बाद नुकसान का वही सिलसिला दोहराया न जाए।


