JMM Assam Election : असम विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के साथ सीट शेयरिंग पर लंबी बातचीत के बावजूद जब सहमति नहीं बन पाई, तो झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने अलग रास्ता चुनते हुए बड़ा फैसला ले लिया। पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह इस बार असम में अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। इस घटनाक्रम ने विपक्षी एकता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं और चुनावी समीकरण को नया मोड़ दे दिया है।
21 सीटों पर उतारे प्रत्याशी
नामांकन के अंतिम दिन यानी 23 मार्च को JMM ने बड़ा ऐलान करते हुए 21 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही पार्टी ने सभी सीटों के लिए उम्मीदवारों की सूची भी जारी कर दी। यह कदम दिखाता है कि पार्टी इस बार असम की राजनीति में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने के मूड में है।
गुवाहाटी से विनोद पांडेय का बयान
गुवाहाटी में मौजूद पार्टी के केंद्रीय महासचिव (संगठन) विनोद पांडेय ने फोन पर जानकारी देते हुए कहा कि JMM इस बार पूरी गंभीरता के साथ असम विधानसभा चुनाव लड़ रही है। उन्होंने साफ किया कि पार्टी केवल औपचारिकता निभाने नहीं, बल्कि मजबूती से चुनावी मैदान में उतर रही है और जनता के मुद्दों को लेकर लड़ाई लड़ेगी।
“सम्मान से बड़ा कुछ नहीं” – पार्टी का रुख
वहीं रांची में पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता ने कांग्रेस के साथ बातचीत विफल होने पर दो टूक कहा कि JMM के लिए मान-सम्मान सबसे ऊपर है। सीट शेयरिंग में सम्मानजनक समझौता नहीं होने की वजह से पार्टी ने अलग चुनाव लड़ने का फैसला लिया। यह बयान साफ करता है कि JMM किसी भी कीमत पर अपने राजनीतिक आत्मसम्मान से समझौता नहीं करना चाहती।
फिरकापरस्त ताकतों को हराने का लक्ष्य
पार्टी नेताओं ने यह भी कहा कि JMM पहले भी असम में सीमित सीटों पर चुनाव लड़ती रही है, लेकिन इस बार लक्ष्य बड़ा है। उन्होंने कहा कि पार्टी फिरकापरस्त ताकतों को शिकस्त देने और असम के लोगों की उम्मीदों को पूरा करने के इरादे से मैदान में उतरी है। अब देखना होगा कि JMM का यह दांव असम की राजनीति में कितना असर डालता है।

