Jharkhand News: झारखंड की आदिवासी नेता निशा भगत की मौत की खबर के बाद उनका आखिरी फे/सबुक लाइव चर्चा का विषय बन गया है। बताया जा रहा है कि अपनी फेसबुक लाइव में उन्होंने राज्य सरकार, प्रशासन और जमीन से जुड़े कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाए थे। इस लाइव वीडियो में उन्होंने आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए अपने संघर्ष, व्यक्तिगत परेशानियों और प्रशासन से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने की बात कही थी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, निशा भगत ने फेसबुक लाइव के दौरान हेमंत सोरेन सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने दावा किया था कि आदिवासी समाज के मुद्दों को उठाने और कथित सरकारी कमियों के खिलाफ आवाज बुलंद करने के कारण उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा।
निशा ने फेसबुक पर एक पोस्ट भी साझा की थी। इसमें उन्होंने लिखा था, ‘मेरी मौत की जिम्मेदार झारखंड पुलिस, न डरते हैं मिशनरी से, न बिकते हैं पैसों से, सरकार किसी की भी हो, जमीन हमारी है, जान हमारी है।’
निशा भगत पिठोरिया थाना क्षेत्र के डहुटोली गांव की रहने वाली थीं। उनकी पहचान आदिवासी अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाली नेत्री के रूप में थी। वह सरना धर्म से जुड़े मुद्दों पर भी मुखर रही थीं। पिछले वर्ष इसी मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने अपना सिर मुंडवा लिया था। वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने गुमला सीट से झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के टिकट पर चुनाव लड़ा था। हालांकि, वह चौथे स्थान पर रही थीं।
निशा भगत के निधन की सूचना मिलने के बाद रांची के सांसद एवं केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, जेएलकेएम नेता देवेंद्र नाथ महतो समेत कई लोग रिम्स के पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। संजय सेठ ने घटना पर चिंता जताते हुए राज्य में जमीन माफियाओं को कथित रूप से मिल रही छूट और बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने पिठोरिया थाना प्रभारी को तत्काल निलंबित करने की मांग भी की।
वहीं, भाजपा नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जनजातीय समाज के हक-अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाली और समाज की मुखर आवाज रही युवा नेत्री निशा भगत की आत्महत्या की खबर दुखद है। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, पिठोरिया थाना प्रभारी और अजय तिर्की को जिम्मेवार ठहराया।
मरांडी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के इशारे पर कुछ दलाल आदिवासियों की जमीन हड़पने का प्रयास कर रहे हैं और राज्य के थानों एवं अंचल कार्यालयों में जमीन लूट का खेल चल रहा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज आखिर अपनी ही जमीन पर कब तक प्रताड़ित होता रहेगा।
उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से तत्काल इस्तीफा देने की मांग करते हुए कहा कि निशा भगत ने जिन लोगों को अपनी आत्महत्या के लिए जिम्मेवार बताया है, उन्हें शीघ्र गिरफ्तार किया जाना चाहिए। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
जमीन से जुड़े मामलों में लगाए आरोप
निशा भगत ने जमीन से जुड़े कुछ लोगों पर आरोप लगाए थे। उन्होंने अजय तिर्की का नाम लेते हुए प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े किए थे। उनका कहना था कि संबंधित मामलों में उन्हें उचित सहयोग और न्याय नहीं मिल रहा था। उन्होंने पिठोरिया थाना प्रभारी से फोन पर बातचीत भी की थी। इस बातचीत में उन्होंने पुलिस की कार्यशैली और कार्रवाई को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी।
घर में चोरी की घटना को लेकर भी जताई नाराजगी
निशा भगत ने अपने घर में हुई चोरी की घटना का भी जिक्र किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि पुलिस अब तक चोरी करने वालों को पकड़ने में सफल नहीं हो सकी। इसके अलावा उन्होंने उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने की बात कही थी, जिन पर उन्हें बदनाम करने का आरोप था। उन्होंने कहा था कि आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए लंबे समय से संघर्ष करने के बावजूद उन्हें राजनीतिक दलों और संबंधित लोगों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
माता-पिता का जिक्र कर भावुक हुई थीं निशा भगत
फेसबुक लाइव के दौरान निशा भगत ने अपने माता-पिता का कई बार जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि उनके कारण परिवार को भी काफी कुछ सुनना पड़ रहा था। लाइव में उनकी व्यक्तिगत परेशानियों और सामाजिक संघर्ष की बातें सामने आई थीं।
आरोपों की निष्पक्ष जांच की उठ रही मांग
निशा भगत की मौत के बाद उनके आखिरी फेसबुक लाइव में लगाए गए आरोपों को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। लोग चाहते हैं कि उनके द्वारा उठाए गए जमीन विवाद, पुलिस की कार्यशैली और प्रशासनिक सहयोग से जुड़े सवालों की गंभीरता से जांच हो।
हालांकि, फेसबुक लाइव में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हुई है। ऐसे में संबंधित लोगों की भूमिका और पूरे घटनाक्रम पर जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल इस मामले में निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की मांग की जा रही है।


