Palamu News: पलामू जिले के नौडीहा बाजार थाना क्षेत्र स्थित डगरा पिकेट में शनिवार को जैप-8 के सूबेदार सह कंपनी कमांडर बुचुन पाल की गोली लगने से मौत हो गई। उन्हें अपने ही सर्विस हथियार से सिर में गोली लगी। घटना के पीछे क्या कारण था और गोली किन परिस्थितियों में चली, यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
घटना की सूचना मिलते ही छतरपुर एसडीपीओ प्रशांत कुमार और नौडीहा बाजार थाना प्रभारी नीरज कुमार पुलिस बल के साथ डगरा पिकेट पहुंचे। अधिकारियों ने मौके का जायजा लिया और वहां मौजूद जवानों से घटना के संबंध में जानकारी ली।
जानकारी के अनुसार, बुचुन पाल शनिवार सुबह अपने कमरे से बाहर निकले थे। फ्रेश होने के बाद वह दोबारा कमरे में चले गए। कुछ ही देर बाद पिकेट में तैनात जवानों ने उनके कमरे से गोली चलने की आवाज सुनी। आवाज सुनकर जवान तत्काल कमरे की ओर पहुंचे। वहां बुचुन पाल गोली लगने से मृत मिले।
घटना के बाद जवानों ने पुलिस अधिकारियों और बुचुन पाल के परिजनों को इसकी सूचना दी। शव को पोस्टमार्टम के लिए मेदिनी राय मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शाम करीब पांच बजे तक चली। इसके बाद शव को उनके पैतृक गांव भेज दिया गया।
पांच माह बाद होने वाली थी सेवानिवृत्ति
बुचुन पाल मूल रूप से पलामू जिले के उंटारी थाना क्षेत्र के जोगा गांव के रहने वाले थे। उनका परिवार फिलहाल रांची के टाटीसिलवे में रहता है। वह करीब 40 वर्षों से पुलिस सेवा में थे। उन्हें एक महीने पहले ही सूबेदार पद पर पदोन्नति मिली थी। इसके बाद उन्हें डगरा पिकेट में तैनात जैप की एफ कंपनी का कंपनी कमांडर बनाया गया था।
उनकी सेवानिवृत्ति 28 फरवरी 2027 को होनी थी। यानी सेवा में करीब पांच महीने का समय ही शेष था। बुचुन पाल अपने पीछे पत्नी, एक पुत्र और दो पुत्रियों को छोड़ गए हैं।
सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है डगरा पिकेट
छतरपुर एसडीपीओ प्रशांत कुमार ने बताया कि सूबेदार बुचुन पाल की गोली लगने से मौत हुई है। पुलिस पूरे मामले की छानबीन कर रही है। गोली कैसे चली और घटना के पीछे क्या वजह थी, इसकी जांच की जा रही है।
डगरा पिकेट पलामू के महत्वपूर्ण सुरक्षा केंद्रों में शामिल है। बिहार के गया जिले से सटा यह इलाका नक्सली गतिविधियों की दृष्टि से संवेदनशील रहा है। यहां पिछले कुछ वर्षों से जैप और आईआरबी के जवान तैनात हैं। वर्ष 2023-24 तक डगरा में सीआरपीएफ की तैनाती थी। इसके बाद जैप को यहां तैनात किया गया।


