Bhagalpur News: सावन के पावन महीने में सुल्तानगंज से देवघर तक जाने वाले कांवड़िया पथ पर श्रद्धालुओं की आस्था के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। करीब 105 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर कोई भगवान शिव की प्रतिमा लेकर यात्रा कर रहा है तो कोई अनोखी कांवड़ के साथ बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के लिए आगे बढ़ रहा है। इसी बीच पश्चिम बंगाल से आए शिवभक्तों का एक जत्था अपनी अनोखी कांवड़ के कारण लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
इस जत्थे के श्रद्धालु महादेव के परम भक्त माने जाने वाले रावण की विशाल प्रतिमा को कांवड़ पर विराजमान कर पैदल बाबा धाम की यात्रा कर रहे हैं। इस कांवड़ की सबसे खास बात इसका वजन है। रावण की प्रतिमा सहित पूरी कांवड़ का वजन करीब 150 किलोग्राम से अधिक बताया जा रहा है। इतने भारी वजन के बावजूद श्रद्धालु उत्साह के साथ कांवड़ लेकर आगे बढ़ रहे हैं।
श्रद्धालुओं का कहना है कि रावण भले ही लंकापति और राक्षस राज के रूप में जाना जाता है, लेकिन वह भगवान शिव का अनन्य भक्त और प्रकांड विद्वान भी था। इसी आस्था के कारण उन्होंने रावण की प्रतिमा को कांवड़ में स्थापित किया है। उनका उद्देश्य अजगैबीनाथ धाम से गंगाजल लेकर रावण को उसके आराध्य भगवान बैद्यनाथ के दरबार तक पहुंचाना है।
श्रद्धालुओं ने बताया कि भारी कांवड़ लेकर चलना निश्चित रूप से चुनौतीपूर्ण है। रास्ते में पथरीली और रेतीली जमीन भी मुश्किल बढ़ाती है, लेकिन भगवान शिव के प्रति आस्था उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही है। उनका कहना है कि जब भोलेनाथ का आशीर्वाद साथ हो तो कांवड़ का वजन और यात्रा की थकान महसूस नहीं होती।
जत्थे के सदस्य रास्तेभर ‘बम-बम भोले’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे हैं। कांवड़ पर विराजमान रावण की विशाल प्रतिमा को देखने के लिए रास्ते में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की भीड़ जुट रही है। कई लोग इस अनोखी कांवड़ की तस्वीरें और वीडियो भी बना रहे हैं।
सावन के दौरान सुल्तानगंज से देवघर तक का कांवड़िया पथ श्रद्धालुओं की भक्ति और उत्साह का गवाह बनता है। इस बार रावण की प्रतिमा वाली 150 किलो से अधिक वजनी कांवड़ यात्रा का अनोखा आकर्षण बनी हुई है।


