Bihar News : पटना। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार अब दिल्ली को अपना नया राजनीतिक ठिकाना बनाने जा रहे हैं। राज्यसभा सदस्य बनने के बाद केंद्र सरकार की ओर से उन्हें लुटियंस दिल्ली के प्रतिष्ठित 9 सुनहरी बाग स्थित टाइप-8 सरकारी बंगले का आवंटन किया गया है। वह 17 जुलाई को नए सरकारी आवास में विधि-विधान से गृह प्रवेश करेंगे। इस अवसर पर पूजा-अर्चना का आयोजन भी किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार गृह प्रवेश कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित भाजपा और जनता दल (यूनाइटेड) के कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना है। हालांकि कार्यक्रम के बाद नीतीश कुमार के उसी दिन पटना लौटने की भी चर्चा है।
लुटियंस दिल्ली में होगा नया राजनीतिक ठिकाना
अब तक बिहार की राजनीति का संचालन पटना से करने वाले नीतीश कुमार का नया आधिकारिक ठिकाना दिल्ली होगा। राजनीतिक जानकार इसे उनके सार्वजनिक जीवन के नए चरण के रूप में देख रहे हैं। राज्यसभा में पहुंचने के बाद राष्ट्रीय राजनीति में उनकी सक्रियता बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
राहुल गांधी और अमित शाह होंगे पड़ोसी
9 सुनहरी बाग दिल्ली के सबसे प्रतिष्ठित और उच्च सुरक्षा वाले वीआईपी इलाकों में गिना जाता है। इसी क्षेत्र में देश के कई वरिष्ठ नेताओं के सरकारी आवास हैं। नए बंगले में शिफ्ट होने के बाद नीतीश कुमार, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पड़ोसी होंगे। इससे उनका राजनीतिक संपर्क और राष्ट्रीय स्तर की गतिविधियों में भागीदारी और आसान हो सकती है।
टाइप-8 बंगले की खासियत
नीतीश कुमार को आवंटित टाइप-8 सरकारी बंगला केंद्र सरकार के सबसे उच्च श्रेणी के सरकारी आवासों में शामिल है। ऐसे बंगलों में विशाल परिसर, हरित क्षेत्र, आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों के लिए अलग सुविधाएं और पर्याप्त आवासीय स्थान उपलब्ध होता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार लुटियंस दिल्ली में टाइप-7 और टाइप-8 श्रेणी के लगभग 520 सरकारी बंगले हैं।
बिहार की राजनीति से नहीं बनेगी दूरी
जानकारी के मुताबिक, नीतीश कुमार के साथ उनके बेटे निशांत भी दिल्ली जाएंगे। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि वह बिहार की राजनीति से दूरी बना लेंगे। पटना और बिहार में उनकी राजनीतिक सक्रियता पहले की तरह जारी रहेगी। लेकिन अब दिल्ली उनका प्रमुख राजनीतिक केंद्र होगा, जहां से वह बिहार और राष्ट्रीय राजनीति दोनों पर नजर रखेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने और राज्यसभा की राजनीति में आने के बाद दिल्ली में स्थायी आवास लेना उनके राजनीतिक सफर के नए अध्याय की शुरुआत का संकेत है।


