Madhepura News: बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बावजूद मधेपुरा जिले के चौसा प्रखंड स्थित प्रखंड संसाधन केंद्र (बीआरसी) भवन में शराब पार्टी का मामला सामने आने से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। सरकारी कार्यालय के अंदर शराब पीने की गुप्त सूचना पर चौसा थाना पुलिस ने छापेमारी की, जिसमें दो शिक्षक और एक डेटा ऑपरेटर शराब के नशे में पाए गए। घटना के बाद जिला शिक्षा विभाग ने तत्काल सख्त कार्रवाई करते हुए दोनों शिक्षकों को निलंबित कर दिया, जबकि डेटा ऑपरेटर को सेवा से हटाने की अनुशंसा की गई है।
जानकारी के अनुसार, उत्पाद विभाग को सूचना मिली थी कि चौसा बीआरसी भवन में कुछ शिक्षक शराब का सेवन कर रहे हैं। सूचना मिलते ही उत्पाद विभाग ने चौसा थाना पुलिस को कार्रवाई के लिए सूचित किया। पुलिस टीम ने बीआरसी भवन में छापेमारी कर चार लोगों को हिरासत में लिया और सभी का ब्रेथ एनालाइजर से परीक्षण कराया।
जांच में नवसृजित प्राथमिक विद्यालय कुल्हड़िया बासा के प्रधान शिक्षक कुन्दन कुमार, एनपीएस नरघू टोला के विशिष्ट शिक्षक राधेश्याम पासवान तथा बीआरसी के डेटा ऑपरेटर अरविंद कुमार के शराब के नशे में होने की पुष्टि हुई। वहीं, एक अन्य शिक्षक की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद उसे छोड़ दिया गया।
उत्पाद अधीक्षक ने बताया कि सूचना मिलने के बाद तत्काल कार्रवाई जरूरी थी। उत्पाद विभाग की टीम के पहुंचने में समय लग सकता था, इसलिए स्थानीय पुलिस को मौके पर भेजा गया। पुलिस की त्वरित कार्रवाई के कारण आरोपितों को मौके से ही पकड़ लिया गया।
घटना की रिपोर्ट मिलते ही जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) ने दोनों शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। जारी आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान दोनों शिक्षकों का मुख्यालय प्रखंड संसाधन केंद्र, कुमारखंड रहेगा। साथ ही दोनों को नियमित रूप से बायोमैट्रिक उपस्थिति दर्ज करानी होगी। जीवन निर्वाह भत्ता भी बायोमैट्रिक उपस्थिति के सत्यापन के बाद ही दिया जाएगा। विभाग ने दोनों शिक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने के लिए प्रपत्र-क जारी करने का भी निर्देश दिया है।
वहीं, शराब पीने के आरोपी डेटा ऑपरेटर अरविंद कुमार को सेवा से हटाने (टर्मिनेट) की अनुशंसा संबंधित विभाग को भेज दी गई है। सरकारी शिक्षा कार्यालय के भीतर शराब सेवन की इस घटना ने शराबबंदी कानून के पालन और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब विभागीय जांच और कानूनी कार्रवाई के बाद मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।


