Nawada News: जिले के हिसुआ प्रखंड से बैंकिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे दूसरे व्यक्ति की पुश्तैनी संपत्ति को आधार बनाकर 20 लाख रुपये का बैंक लोन ले लिया गया। मामले का खुलासा तब हुआ जब बैंक की वसूली टीम वास्तविक मकान मालिक के घर पहुंची। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है और पुलिस जांच में जुट गई है।
जानकारी के अनुसार मामला नवादा जिले के हिसुआ प्रखंड अंतर्गत तुंगी पंचायत के रामपुर मंझवे गांव का है। गांव निवासी तथा पूर्व पैक्स अध्यक्ष ईश्वरी प्रसाद के पुत्र अंकित कुमार उर्फ जितेंद्र यादव ने बताया कि गुरुवार को उत्कर्ष बैंक के कर्मचारी उनके घर पहुंचे। बैंक कर्मियों ने बताया कि सुलेखा देवी, पति हीरा विश्वकर्मा के नाम से 20 लाख रुपये का ऋण लिया गया है और उसकी वसूली के सिलसिले में वे आए हैं।
यह जानकारी सुनते ही परिवार के लोग हैरान रह गए। उनका कहना है कि जिस मकान के नाम पर ऋण स्वीकृत किया गया है, वह उनकी पुश्तैनी संपत्ति है और उन्होंने कभी इस संपत्ति को गिरवी नहीं रखा। परिवार के अनुसार उन्हें इस पूरे मामले की कोई जानकारी नहीं थी और बैंक की वसूली टीम के पहुंचने के बाद ही कथित धोखाधड़ी का पता चला।
पीड़ित अंकित कुमार ने आरोप लगाया है कि उनके ही एक पड़ोसी ने उनकी संपत्ति से जुड़े कथित फर्जी दस्तावेज और वीडियो का इस्तेमाल कर अपनी पत्नी के नाम से बैंक से 20 लाख रुपये का लोन हासिल कर लिया। उनका कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह न केवल जालसाजी का मामला है, बल्कि बैंक की सत्यापन प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
घटना सामने आने के बाद पीड़ित परिवार ने हिसुआ थाना में लिखित आवेदन देकर मामले की शिकायत दर्ज कराई है। आवेदन में संबंधित लोगों को नामजद करते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
इधर, हिसुआ थानाध्यक्ष मृत्युंजय ने बताया कि पीड़ित परिवार का आवेदन प्राप्त हो गया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि किन दस्तावेजों के आधार पर ऋण स्वीकृत किया गया, दस्तावेजों की सत्यता क्या है और इस कथित फर्जीवाड़े में किन-किन लोगों की भूमिका रही। पुलिस का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


