Jharkhand News : झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के घने सारंडा जंगल में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ के बाद घायल जवानों को बेहतर इलाज के लिए तेजी से मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराई गई। इस दौरान मानवता और प्रशासनिक तत्परता का बेहतरीन उदाहरण देखने को मिला, जब दो गंभीर रूप से घायल जवानों को ग्रीन कॉरिडोर बनाकर एयर एंबुलेंस से दिल्ली भेजा गया।
मिली जानकारी के अनुसार, सीआरपीएफ की कोबरा 205 बटालियन के इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश और शैलेश कुमार दुबे मुठभेड़ में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। दोनों को पहले हेलीकॉप्टर के जरिए रांची लाया गया, जहां उन्हें शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर उपचार के लिए दिल्ली रेफर करने का निर्णय लिया।
गुरुवार को रांची ट्रैफिक पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए अस्पताल से एयरपोर्ट तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया। ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह के नेतृत्व में पूरी टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए रास्ते को पूरी तरह खाली कराया, ताकि एंबुलेंस बिना किसी बाधा के एयरपोर्ट तक पहुंच सके। इसका परिणाम यह रहा कि आमतौर पर लगने वाला समय घटकर महज 4 से 5 मिनट रह गया और घायल जवानों को समय पर एयर एंबुलेंस तक पहुंचा दिया गया।
उल्लेखनीय है कि यह मुठभेड़ 15 अप्रैल को सारंडा के जंगलों में हुई थी, जिसमें कोबरा बटालियन के कुल चार जवान घायल हो गए थे। घायलों में सत्य प्रकाश और शैलेश कुमार दुबे के अलावा प्रेमचंद दास और जितेंद्र कुमार राय भी शामिल हैं। सभी को प्राथमिक इलाज के लिए रांची लाया गया था।
सीआरपीएफ अधिकारियों के अनुसार, जितेंद्र कुमार राय के बाएं पैर में गोली लगी थी, जबकि शैलेश कुमार दुबे की गर्दन में गोली लगी है, जो गंभीर स्थिति को दर्शाती है। वहीं प्रेमचंद दास के घुटने के नीचे गोली लगी थी और सत्य प्रकाश को स्प्लिंटर इंजरी हुई थी।
फिलहाल दो जवानों को दिल्ली भेजा गया है, जबकि अन्य दो का इलाज रांची में जारी है। इस पूरी घटना में प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की समन्वित कार्रवाई ने यह साबित किया कि आपात स्थिति में त्वरित निर्णय और बेहतर तालमेल से जान बचाई जा सकती है।


