बढ़ा शिक्षा बजट, स्कूल और कॉलेजों का हुआ जबरदस्त विकास
बेटियों की पढ़ाई को मिली रफ्तार, सरकारी योजनाओं से बदली तस्वीर
Patna News: बिहार में शिक्षा की तस्वीर अब पूरी तरह बदल चुकी है। जहां कभी स्कूलों में केवल ब्लैक बोर्ड और जर्जर भवन दिखते थे, अब वहां स्मार्ट क्लास और डिजिटल शिक्षा का दौर शुरू हो गया है। वर्ष 2005 से पहले प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था बदहाल थी। खासकर बेटियों के लिए पढ़ाई एक सपना थी। महिला साक्षरता दर मात्र 33.57 फीसदी थी जो अब करीब 74 फीसदी तक पहुंच गई है।
नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद शिक्षा पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया। खासकर लड़कियों की पढ़ाई को बढ़ावा देने के लिए साइकिल योजना, पोशाक योजना, छात्रवृत्ति और मिड डे मील जैसी योजनाएं शुरू की गईं। इसका बड़ा असर दिखा और स्कूलों में लड़कियों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ।
प्रदेश में स्कूलों की संख्या 2005 के पहले 53,993 थी जो अब 75,812 हो गई है। शिक्षकों की संख्या में भी तीन गुना बढ़ोतरी हुई है। पहले जहां सिर्फ 2.25 लाख शिक्षक थे वहीं अब 5.97 लाख शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे हैं। स्कूलों में अच्छी इमारतें, शौचालय, स्वच्छ पानी और स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाएं उपलब्ध हो चुकी हैं।
तकनीकी शिक्षा में भी बिहार ने नई ऊंचाई छुई है। अब राज्य में 38 इंजीनियरिंग कॉलेज, 46 पॉलिटेक्निक और 152 आईटीआई चल रहे हैं। इसके अलावा IIT पटना, IIM बोधगया और IIIT भागलपुर जैसे बड़े संस्थान युवाओं को नई दिशा दे रहे हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में यह क्रांतिकारी बदलाव राज्य के बढ़े हुए शिक्षा बजट की देन है, जो 2005 के 4,366 करोड़ से बढ़कर अब 77,690 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।


