Patna News :- बिहार में सरकारी नौकरियों में डोमिसाइल नीति लागू करने की मांग को लेकर बुधवार को राजधानी पटना की सड़कों पर हजारों छात्र उतर आए। पटना कॉलेज से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन शहर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ा। प्रदर्शनकारी छात्रों ने “वोट दे बिहारी, नौकरी ले बाहरी – अब नहीं चलेगा” जैसे नारे लगाकर बिहार सरकार से स्पष्ट डोमिसाइल नीति की मांग की। उनका कहना है कि जब पड़ोसी राज्यों—जैसे झारखंड, उत्तराखंड में स्थानीय युवाओं को रोजगार में वरीयता दी जा सकती है, तो बिहार में क्यों नहीं?
छात्रों का यह आंदोलन अब “महान छात्र आंदोलन” के रूप में सामने आया है। प्रदर्शनकारी गांधी चौक, मुसल्लहपुर हाट, भिखना पहाड़ी, नया टोला, हथुआ मार्केट होते हुए जेपी गोलंबर और डाक बंगला चौराहा तक पहुंचे, जहां पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शन को रोकने का प्रयास किया। कई जगहों पर हल्का बल प्रयोग कर छात्रों को हटाया गया।
प्रदर्शन में शामिल छात्र नेता दिलीप कुमार ने मीडिया से कहा, “जब वोट देने की बारी आती है, तब बिहारी याद आता है। लेकिन जब नौकरी देने की बारी आती है, तो बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जाती है। अब यह अन्याय बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
छात्रों की मांग है कि प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शिक्षक बहाली से लेकर दारोगा, सिपाही, लाइब्रेरियन, बीपीएससी और तमाम सरकारी भर्तियों में 90% से 100% तक डोमिसाइल नीति लागू की जाए, ताकि बिहार के युवाओं को न्याय मिल सके।
सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेज़ी से ट्रेंड कर रहा है। छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार जल्द कोई ठोस नीति नहीं लाती, तो आंदोलन और व्यापक किया जाएगा।


