वंचितों, पिछड़ों, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों को मताधिकार से वंचित करने की साजिश
Patna News: नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पटना स्थित अपने आवास पर इंडिया महागठबंधन के नेताओं संग संवाददाता सम्मेलन कर चुनाव आयोग की ओर से घोषित विशेष मतदाता गहन पुनरीक्षण अभियान पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि चुनाव से ठीक पहले 8 करोड़ मतदाताओं का 25 दिनों में पुनरीक्षण कराना लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ है। तेजस्वी ने इस कवायद को वंचितों, पिछड़ों, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों को मताधिकार से वंचित करने की साजिश करार दिया।
तेजस्वी ने कहा कि बिहार में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 73% लोग रहते हैं, ऐसे में लोग अपनी जान-माल बचाएं या कागजात जुटाकर अपनी नागरिकता साबित करें? 90% क्षेत्रों में अब तक मतदाता सूची ही नहीं पहुंची है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब 2024 में लोकसभा चुनाव इसी वोटर लिस्ट पर हुआ तो अब उसे अमान्य क्यों माना जा रहा है? उन्होंने आरोप लगाया कि 18 से 40 वर्ष की उम्र के करोड़ों मतदाताओं से माता-पिता का जन्म प्रमाणपत्र और स्थायी निवास प्रमाण मांगा जा रहा है, जबकि 2001 से 2025 तक जन्मे बच्चों में सिर्फ 2.8% के पास ही जन्म प्रमाणपत्र है।
कांग्रेस, भाकपा माले, वीआईपी, सीपीआई और सीपीआई (एम) के नेताओं ने भी सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि जब-जब बीजेपी संकट में आती है, चुनाव आयोग का सहारा लेती है। सीपीआई माले नेता दीपांकर भट्टाचार्य ने इसे “वोटबंदी” करार दिया, जबकि अन्य नेताओं ने इस कवायद को एनआरसी जैसी साजिश बताते हुए कहा कि इससे गरीबों को मताधिकार से वंचित करने की कोशिश हो रही है।महागठबंधन ने मांग की है कि यह पुनरीक्षण अभियान तुरंत रोका जाए और सभी दलों से चर्चा के बाद ही कोई फैसला लिया जाए।


