Bihar News: बिहार के किशनगंज जिले से एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक खोज सामने आई है, जिसने स्थानीय लोगों के साथ-साथ इतिहास प्रेमियों का भी ध्यान आकर्षित किया है। बहादुरगंज थाना क्षेत्र के रामचर भैरादह गांव में मिट्टी खुदाई के दौरान भगवान विष्णु की एक प्राचीन मूर्ति बरामद हुई है। यह मूर्ति करीब 800 वर्ष पुरानी बताई जा रही है और विशेषज्ञ इसे कर्णाट वंश काल की मान रहे हैं।
मूर्ति ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित है, जिसकी लंबाई लगभग 49 इंच और चौड़ाई 21 इंच है। इसकी बनावट और शिल्पकला काफी आकर्षक है, जो उस समय की उन्नत कला शैली को दर्शाती है। जैसे ही मूर्ति मिलने की खबर आसपास के इलाकों में फैली, बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु मौके पर पहुंचने लगे। लोगों में इसे लेकर गहरी आस्था और उत्साह देखने को मिला।
इस महत्वपूर्ण खोज की जानकारी मिलने पर बिहार स्टेट इंटैक के को-कन्वेनर डॉ. शिव कुमार मिश्र ने तुरंत पुरातत्व विभाग को सूचित किया। इसके बाद नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए मूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए भागलपुर संग्रहालय भेज दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी पुरानी और दुर्लभ मूर्ति को वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित करना बेहद जरूरी है, ताकि इसका ऐतिहासिक महत्व भविष्य में भी बना रहे।
हालांकि, स्थानीय ग्रामीणों की इच्छा है कि इस प्रतिमा को गांव में ही स्थापित किया जाए। इसके लिए उन्होंने जिलाधिकारी विशाल राज को आवेदन भी सौंपा है। ग्रामीणों का कहना है कि वे मंदिर निर्माण के लिए करीब पांच कट्ठा जमीन दान कर चुके हैं और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू करने की योजना है। उनका मानना है कि इससे गांव में धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल मजबूत होगा।
दूसरी ओर, पुरातत्व विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि 100 वर्ष से अधिक पुरानी वस्तुएं राष्ट्रीय धरोहर के अंतर्गत आती हैं, इसलिए उन्हें संग्रहालय में सुरक्षित रखना ही उचित होता है। इससे शोधकर्ताओं और पर्यटकों को भी ऐसे दुर्लभ अवशेषों को देखने और समझने का अवसर मिलता है।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किशनगंज जिले से प्राचीन मूर्तियां मिली हों। इससे पहले वर्ष 2023 में भी बंदरझुला क्षेत्र से भगवान विष्णु, गरुड़ और त्रिविक्रम की मूर्तियां मिली थीं, जिन्हें भागलपुर संग्रहालय में संरक्षित किया गया है। इस नई खोज ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि किशनगंज क्षेत्र में प्राचीन सभ्यता के महत्वपूर्ण अवशेष मौजूद हैं, जिन पर और शोध की आवश्यकता है।


