Ranchi News;- केन्द्रीय सरना समिति ने इस वर्ष विश्व आदिवासी दिवस को झारखंड आंदोलन के महानायक और दिशुम गुरु के नाम से लोकप्रिय शिबू सोरेन के सम्मान में सादगीपूर्वक मनाया। समिति ने इसे इस बार “संकल्प दिवस” के रूप में आयोजित किया, जिसमें आदिवासी समाज के अधिकार, पहचान और अस्तित्व की रक्षा का संकल्प लिया गया।
समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा ने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों का सपना आज भी अधूरा है। सीएनटी और एसपीटी एक्ट होने के बावजूद आदिवासियों की जमीन की लूट जारी है। खनिज संपदा से संपन्न होने के बावजूद आदिवासी समाज पिछड़ेपन से जूझ रहा है और पारंपरिक धार्मिक व्यवस्था संकट में है। उन्होंने कहा कि गुरुजी के निधन ने पूरे आदिवासी समाज को गहरा आघात पहुंचाया है, इसलिए इस वर्ष उत्सव की जगह सादगी और संकल्प को प्राथमिकता दी गई।
इससे पहले शनिवार सुबह बबलू मुंडा के नेतृत्व में भगवान बिरसा मुंडा समाधि स्थल, कोकर में 151 मिट्टी के दीप जलाए गए। बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर झारखंड के वीर शहीदों को नमन किया गया। कार्यक्रम में मौजूद मुख्य पहान जगलाल पहान ने जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए संगठित होकर संघर्ष का आह्वान किया और वीर शहीदों के पदचिन्हों पर चलने की आवश्यकता पर बल दिया।
बबलू मुंडा ने कहा कि यह दिवस हर वर्ष हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता रहा है, लेकिन इस बार दिशुम गुरु के सम्मान में इसे श्रद्धा और संकल्प के साथ मनाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासी समाज को अपनी संस्कृति, भाषा और धार्मिक परंपराओं की रक्षा के लिए एकजुट रहना होगा।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से केन्द्रीय सरना समिति अध्यक्ष बबलू मुंडा, मुख्य पहान जगलाल पहान, महादेव टोप्पो, झारखंड आंदोलनकारी कुमोद कुमार वर्मा, सुरेन्द्र लिंडा, संजय नायक, मुकेश मुंडा, आशीष मुंडा, विशाल मुंडा, संतोष मुंडा, महादेव मुंडा, राकेश मुंडा, मानिष मुंडा, सोनू मुंडा, अंजन मुंडा, रिसव मुंडा, अनुकल मुंडा, युवराज मुंडा, नरेश मुंडा, शम्भू टोप्पो, माईकल टोप्पो सहित बड़ी संख्या में समुदाय के लोग शामिल हुए।
इस अवसर पर मौजूद लोगों ने संकल्प लिया कि गुरुजी के बताए रास्ते पर चलकर जल-जंगल-जमीन की रक्षा, आदिवासी अस्मिता और एकजुटता की भावना को आगे बढ़ाएंगे।

