Nawada News: जिले में बिहार–झारखंड सीमा पर स्थित रजौली जांच चौकी के समीप सोमवार को पलटी स्कॉर्पियों से बरामद भारी मात्रा में शराब मामले में न केवल शराब तस्करी के नेटवर्क को उजागर किया, बल्कि सीमा पर मौजूद जांच व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, रजौली ओवरब्रिज के पास बीएसएनएल कार्यालय के सामने एक स्कॉर्पियो वाहन दुर्घटनाग्रस्त होकर पलट गया। घटना के तुरंत बाद चालक मौके से फरार हो गया, जिससे मामला और संदिग्ध हो गया। जब पुलिस मौके पर पहुंची और वाहन की तलाशी ली, तो उसमें से करीब 648 लीटर अंग्रेजी शराब बरामद की गई। इतनी बड़ी मात्रा में शराब मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई और स्थानीय लोगों में आक्रोश भी देखा गया।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि दुर्घटनाग्रस्त स्कॉर्पियो पर BR 01JP 3789 नंबर प्लेट लगी हुई थी। हालांकि, जब इस नंबर की गहराई से जांच की गई, तो यह फर्जी निकला। बाद में वाहन का असली नंबर JH01 GJ 7823 पाया गया, जो झारखंड के डोमचांच निवासी प्रदीप कुमार मेहता के नाम से पंजीकृत बताया जा रहा है। इस खुलासे से यह साफ हो गया कि शराब तस्कर पकड़े जाने से बचने के लिए फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल कर रहे थे।
इस पूरे घटनाक्रम ने रजौली जांच चौकी की भूमिका पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सीमा पर सख्त जांच और पर्याप्त संसाधनों की व्यवस्था है, तो इतनी बड़ी मात्रा में शराब से लदा वाहन आखिरकार जांच चौकी को पार कैसे कर गया। लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि कहीं इस मामले में मिलीभगत या भ्रष्टाचार तो नहीं है।
घटना के बाद से क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं और लोग जांच व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है और जल्द ही दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अब देखना यह है कि इस मामले में प्रशासन क्या कदम उठाता है और क्या जांच चौकी की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए कोई ठोस पहल की जाती है। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो लोगों का कानून व्यवस्था पर से भरोसा कमजोर हो सकता है।


