Bhagalpur News: सावन के पवित्र महीने में सुल्तानगंज के अजगैबीनाथ गंगा धाम से झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम तक जाने वाले कच्ची कांवड़िया पथ पर आस्था के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। इसी बीच पश्चिम बंगाल के शिवभक्त संतोष साह अपनी अनोखी भक्ति के कारण श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।
संतोष साह करीब 105 किलोमीटर की कठिन पैदल कांवड़ यात्रा आंखों पर पट्टी बांधकर पूरी कर रहे हैं। उनका यह अनोखा संकल्प कांवड़िया पथ से गुजरने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच कौतूहल का विषय बना हुआ है।
आमतौर पर श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ के दरबार में अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए प्रार्थना करते हैं, लेकिन संतोष साह की यात्रा का उद्देश्य कुछ अलग है। उनका कहना है कि वह महादेव से कुछ मांगने नहीं, बल्कि उन्हें धन्यवाद देने के लिए बाबा धाम जा रहे हैं। संतोष के मुताबिक, भगवान शिव ने उन्हें बिना मांगे ही बहुत कुछ दिया है और अब उनके पास महादेव से मांगने के लिए कुछ बाकी नहीं है।
संतोष साह बताते हैं कि उनके दो बेटे और एक बेटी हैं। वह अपनी संतानों को भगवान शिव का सबसे अनमोल उपहार मानते हैं। उनका कहना है कि जब महादेव ने उनकी झोली पहले ही खुशियों से भर दी है, तो वह बाबा धाम पहुंचकर सिर्फ भगवान का आभार व्यक्त करना चाहते हैं।
सुल्तानगंज में लिया अनोखा संकल्प
संतोष ने बताया कि सुल्तानगंज पहुंचकर उत्तरवाहिनी गंगा से पवित्र जल भरने के बाद उनके मन में अचानक एक संकल्प आया। उन्होंने तय किया कि बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचने तक वह अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर ही पैदल यात्रा करेंगे। इस दौरान वह रास्ते में महादेव के अलावा किसी अन्य का दर्शन नहीं करेंगे।
हालांकि, आंखों पर पट्टी बांधकर इतनी लंबी दूरी तय करना बेहद चुनौतीपूर्ण है। इस कठिन यात्रा में उनके साले आलोक साव लगातार उनके साथ चल रहे हैं। आलोक उनकी आंखों के लिए मार्गदर्शक बने हुए हैं और हाथ थामकर उन्हें रास्ते के गड्ढों, पत्थरों और अन्य बाधाओं के बारे में लगातार बताते हैं।
कच्ची कांवड़िया पथ पर संतोष साह को इस तरह यात्रा करते देखकर श्रद्धालु भी हैरान हैं। कई लोग उनकी भक्ति और संकल्प की सराहना कर रहे हैं। वहीं, उनके साले का लगातार साथ देना भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
संतोष की यह अनोखी कांवड़ यात्रा सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान खींच रही है। आस्था, संकल्प और परिवार के सहयोग का यह अनूठा उदाहरण कांवड़िया पथ पर श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण और प्रेरणा का केंद्र बना हुआ है।


