3.75 करोड़ मतदाता करेंगे 1314 उम्मीदवारों का भविष्य तय
बिहार चुनाव: महिला और युवा मतदाता बनेंगे ‘किंगमेकर’, 15 मंत्रियों की किस्मत ईवीएम में बंद होगी
Patna News: बिहार विधानसभा चुनाव-2025 अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। पहले चरण में गुरुवार को राज्य के 18 जिलों की 121 सीटों पर मतदान होगा। इस चरण में 3.75 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिनमें 1.76 करोड़ महिलाएं और 19 लाख से अधिक प्रथम मतदाता शामिल हैं।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल ने बताया कि पहले चरण में कुल 1314 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 122 महिलाएं और 1192 पुरुष शामिल हैं। मतदान सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक होगा, जबकि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में समय घटाया गया है।
इस चरण में जिनकी प्रतिष्ठा दांव पर है, उनमें दोनों उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा के साथ-साथ 15 मंत्रियों का भाग्य भी मतपेटियों में बंद होगा। तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव समेत कई बड़े नेताओं की सीटों पर भी सबकी निगाहें टिकी हैं। इसके अलावा लोकगायिका मैथिली ठाकुर और अभिनेता खेसारी लाल यादव जैसे नए चेहरे भी इस चुनावी जंग में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम:
शांतिपूर्ण मतदान के लिए राज्य भर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। करीब साढ़े चार लाख सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं, जिनमें 1500 कंपनी केंद्रीय बल की शामिल है। बिहार पुलिस, एसएसबी, बीएसएपी, होमगार्ड और प्रशिक्षु सिपाहियों को चुनावी ड्यूटी में लगाया गया है। नेपाल सीमा सहित सभी सीमावर्ती जिलों की सीमाएं सील कर दी गई हैं, जबकि दियारा क्षेत्रों में घुड़सवार दल तैनात हैं।
कौन-कौन मैदान में:
राजग की ओर से भाजपा के 48, जदयू के 57, लोजपा-आर के 14 और रालोमो के 2 उम्मीदवार मैदान में हैं। वहीं, महागठबंधन ने राजद के 73, कांग्रेस के 24, भाकपा माले के 14, भाकपा के 5, माकपा के 3 और वीआईपी के 5 प्रत्याशी उतारे हैं।
महिला मतदाताओं की भूमिका निर्णायक:
इस बार कुल मतदाताओं में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 47.2% है। यही वजह है कि राजग ‘सुरक्षित बहन-बेटी’ और ‘सशक्त महिला-सशक्त बिहार’ जैसे नारे दोहरा रहा है, जबकि महागठबंधन महंगाई, रोजगार और शिक्षा के मुद्दों के जरिये महिलाओं को लुभा रहा है।
जातीय और क्षेत्रीय समीकरण:
पहले चरण में मगध, मिथिलांचल, मुंगेर, वैशाली और तिरहुत जैसे क्षेत्र शामिल हैं, जहां यादव, दलित, कुशवाहा और मुसलमान मतदाता प्रभावशाली हैं। भाजपा जहां ‘राम मंदिर’ और ‘सनातन गौरव’ के मुद्दे को केंद्र में रखे है, वहीं राजद-कांग्रेस गठबंधन ‘सामाजिक न्याय’ और ‘रोजगार’ को प्रमुख मुद्दा बना रहा है।
चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि पहले चरण का मतदान पूरे बिहार के सियासी रुझान की दिशा तय करेगा। अगर महिला और युवा मतदाता एकतरफा वोट करते हैं, तो नतीजे अप्रत्याशित हो सकते हैं।