Deoghar News:- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज झारखंड के देवघर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के पहले दीक्षांत समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने संस्थान के छात्रों, डॉक्टरों और संकाय को संबोधित किया और देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में उनकी भूमिका को रेखांकित किया। राष्ट्रपति ने कहा कि भले ही एम्स देवघर तृतीयक (टर्शियरी) स्वास्थ्य सेवा केंद्र के रूप में कार्य करता है, लेकिन उसे प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में भी सक्रिय योगदान देना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि संस्थान के डॉक्टर और छात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का नियमित दौरा करें, जिससे जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हो सके। राष्ट्रपति ने स्नातक छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि एम्स से शिक्षा प्राप्त करना इस बात का प्रमाण है कि वे योग्य डॉक्टर बन चुके हैं। उन्होंने डॉक्टरों से आग्रह किया कि वे सिर्फ तकनीकी रूप से दक्ष नहीं, बल्कि संवेदनशील और सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार वाले चिकित्सक भी बनें। उन्होंने कहा, “हम सभी ऐसे डॉक्टरों को जानते हैं जिनसे परामर्श लेने के बाद मरीज और परिजन मानसिक रूप से भी बेहतर महसूस करते हैं।”
राष्ट्रपति ने देश में स्वास्थ्य सेवाओं की असमानता को दूर करने में एम्स जैसे संस्थानों की महत्त्वपूर्ण भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकार लोगों पर जेब से खर्च होने वाले स्वास्थ्य खर्च को कम करने का प्रयास कर रही है और इस दिशा में एम्स देवघर की भी अहम भूमिका है। उन्होंने संस्थान को सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की सूची तैयार कर राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर योगदान देने का सुझाव भी दिया। अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि एम्स देवघर जैसे संस्थान झारखंड और आसपास के क्षेत्रों में चिकित्सा सेवा के “प्रकाश स्तंभ” बनकर काम करें।
बाबा बैद्यनाथ की धरती पर मिली उपस्थिति का सौभाग्य
श्रीमती मुर्मू ने कहा कि श्रावण मास के इस पवित्र अवसर पर बाबा बैद्यनाथ धाम, बासुकीनाथ और हृदयपीठ की कृपा इस आयोजन पर विशेष रूप से बरस रही है। उन्होंने कहा, “यह मेरा परम सौभाग्य है कि भगवान शंकर की असीम अनुकंपा से मुझे इस भूमि पर आने का अवसर प्राप्त हुआ।”
विद्यार्थियों को संवेदनशील डॉक्टर बनने का संदेश
राष्ट्रपति ने दीक्षांत समारोह में उपाधियाँ प्राप्त कर रहे छात्रों को बधाई दी और विशेष रूप से पदक विजेताओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि एम्स में शिक्षा प्राप्त करना कुशल डॉक्टर बनने की गारंटी है, लेकिन एक “अच्छा डॉक्टर” बनने के लिए मानवीय मूल्यों, संवेदनशीलता और संवाद की क्षमता का होना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा,
“डायग्नोसिस में भले ही आप पूरी तरह क्लिनिकल रहिए, लेकिन व्यवहार में संवेदनशील और सहानुभूतिपूर्ण बनिए। मरीजों के साथ ऐसा व्यवहार कीजिए कि वे आपसे मिलकर बेहतर महसूस करें।”

