Muzaffarpur News बिहार के मुजफ्फरपुर में सोमवार को एक दर्दनाक हादसे में सेप्टिक टैंक के अंदर जहरीली गैस की चपेट में आने से दो मजदूरों की मौत हो गई। दोनों को बचाने के लिए टैंक में उतरा तीसरा मजदूर भी गैस की चपेट में आकर बेहोश हो गया। उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। चिकित्सकों के अनुसार उसकी हालत खतरे से बाहर है।
घटना सिकंदरपुर थाना क्षेत्र की है। पुलिस के अनुसार स्थानीय निवासी मुन्ना गुप्ता के नवनिर्मित मकान में करीब 15 दिन पहले सेप्टिक टैंक की ढलाई कराई गई थी। सोमवार सुबह टैंक के अंदर लगी सेंट्रिंग खोलने के लिए अली नेउरा, मीनापुर निवासी मजदूर सोनू कुमार टैंक में उतरा था। टैंक के अंदर पहुंचते ही उसकी तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश होकर नीचे गिर पड़ा।
बचाने उतरा ठेकेदार भी हुआ बेहोश
सोनू को टैंक के अंदर बेहोश पड़ा देखकर ठेकेदार मोहम्मद जहांगीर उसे बचाने के लिए अंदर उतरा। लेकिन कुछ ही देर में वह भी जहरीली गैस की चपेट में आ गया और बेहोश होकर टैंक के अंदर गिर पड़ा। दोनों को बेहोश देखकर तीसरे मजदूर दिनेश कुमार ने उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की। इस दौरान वह भी गैस की चपेट में आकर बेहोश हो गया।
घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों और अन्य मजदूरों की मदद से तीनों को किसी तरह सेप्टिक टैंक से बाहर निकाला गया। हालांकि तब तक सोनू कुमार और मोहम्मद जहांगीर की मौत हो चुकी थी। पुलिस के अनुसार दोनों मृतक आपस में रिश्तेदार थे। घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया और गांव में मातम छा गया।
तीसरे मजदूर की हालत खतरे से बाहर
गैस की चपेट में आए दिनेश कुमार को तत्काल इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सकों ने उसकी हालत खतरे से बाहर बताई है। घटना की सूचना मिलने पर सिकंदरपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसकेएमसीएच) भेज दिया।
सुरक्षा मानकों की जांच में जुटी पुलिस
सिकंदरपुर थाना प्रभारी रवि भूषण ने बताया कि प्रथम दृष्टया बंद सेप्टिक टैंक में जहरीली गैस के कारण दम घुटने से दोनों मजदूरों की मौत होने की आशंका है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। निर्माण स्थल पर सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम किए गए थे या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।
यह हादसा एक बार फिर बंद सेप्टिक टैंक, सीवर या अन्य संकरे स्थानों में बिना सुरक्षा उपकरण और गैस की जांच के प्रवेश करने के खतरे को सामने लाता है।


